मंदसौर। राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से जुड़ी बैठकों में भारत का पक्ष रखते हुए सभी सदस्य देशों से समय पर अंशदान जमा करने की अपील की। उन्होंने 5 से 9 अक्टूबर तक न्यूयॉर्क में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में भाग लिया और संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय व्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
इस दौरान गुर्जर ने बजटीय समिति की चेयरपर्सन जूलियाना गैस्पर रुआस से मुलाकात की। बैठक में संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट और शांति स्थापना अभियानों के बजट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
गुर्जर ने कहा कि सभी सदस्य देशों को अपना निर्धारित अंशदान समय पर जमा करना चाहिए, ताकि संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में बाधा न आए। उन्होंने बताया कि 30 सितंबर 2026 तक संयुक्त राष्ट्र पर 5.6 अरब डॉलर से अधिक की बकाया राशि थी। अंशदान में देरी से संगठन की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
विकासशील देशों पर अतिरिक्त भार न पड़े-
गुर्जर ने कहा कि भारत नियमित रूप से अपना अंशदान जमा करता है। उन्होंने शांति स्थापना अभियानों में सैन्य बल उपलब्ध कराने वाले विकासशील देशों को भुगतान में होने वाली देरी पर चिंता जताई। उन्होंने जोर दिया कि अंशदान की आकलन पद्धति में किसी भी बदलाव से इन देशों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
साओ टोमे और प्रिंसिपे के मतदान अधिकारों का समर्थन-
गुर्जर ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 19 के तहत साओ टोमे और प्रिंसिपे को महासभा के 81वें सत्र की समाप्ति तक मतदान की अनुमति देने संबंधी सिफारिश का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों की बकाया राशि के पीछे कुछ ऐसी परिस्थितियां हो सकती हैं, जो उनके नियंत्रण से बाहर हों। ऐसे मामलों पर उचित विचार किया जाना चाहिए।