शहडोल। दिल्ली-मुंबई में विरोध-प्रदर्शनों के बीच अब शहडोल में भी Gen Alpha का हल्लाबोल थमने का नाम नहीं ले रहा। यहां छात्रावासों की व्यवस्थाओं से नाराज छात्र-छात्राएं अब शिकायतों के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने के बजाय खुद सड़क पर उतर रहे हैं।
ताजा मामला गोहपारू के माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर का है, जहां भोजन, शिक्षा और भवन की मांग को लेकर 32 छात्राएं सुबह करीब 4 बजे छात्रावास से निकल पड़ीं। करीब 16 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर से मिलने पहुंचीं छात्राओं के इस कदम ने छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, गोहपारू स्थित माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर किराए के भवन में संचालित हो रहा है। छात्राएं भोजन, शिक्षा और भवन से जुड़ी समस्याओं को लेकर नाराज थीं। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने सुबह तड़के छात्रावास से निकलकर सीधे कलेक्टर से मिलने का फैसला किया, छात्राओं का इस तरह कई किलोमीटर पैदल चलकर प्रशासन तक पहुंचना बताता है कि उनकी समस्याओं को लेकर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर छात्रावासों में ऐसी कौन-सी समस्याएं हैं, जिनके चलते छात्र-छात्राओं को अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए आधी रात या सुबह चार बजे सड़क पर उतरना पड़ रहा है? रिपोर्ट के मुताबिक, दो महीने में यह पांचवीं ऐसी घटना है। इससे पहले जैतपुर क्षेत्र के विरौड़ी स्थित एकलव्य छात्रावास में 150 से अधिक छात्र दीवार लांघकर कलेक्टर से मिलने निकल पड़े थे। बाद में छात्राओं के भी छात्रावास की दीवार पार कर सड़क पर आने की घटना सामने आई थी।
शहडोल में छात्र-छात्राओं के लगातार विरोध को नई पीढ़ी के बदलते तेवर के तौर पर देखा जा रहा है। सवाल सिर्फ छात्राओं के छात्रावास से निकलने का नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों का है, जिन्होंने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया। अब प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ छात्राओं को वापस छात्रावास पहुंचाने की नहीं, बल्कि भोजन, शिक्षा और भवन से जुड़ी मांगों की जांच कर उनका स्थायी समाधान निकालने की है।
इस पूरे मामले में असिस्टेंट कमिश्नर आनंद राय सिन्हा का का कहना है कन्या शिक्षा परिसर की 32 छात्राएं सुबह 3:30 से 4 बजे के बीच बाहर निकल गई थीं, अधिकारियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर तीन गाड़ियों से सभी बच्चियों को सुरक्षित हॉस्टल वापस पहुंचाया, सुबह 7:30 बजे उनकी काउंसलिंग की गई, परिसर किराए के भवन में संचालित है, जहां छात्राओं की संख्या अधिक होने से टॉयलेट और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
बच्चियां नए भवन की मांग कर रही हैं, लेकिन गोहपारू में भवन अभी स्वीकृत और निर्मित नहीं हुआ है। भोजन व्यवस्था में कमियों पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। छात्राओं को कोई दंड नहीं दिया जाएगा, लेकिन लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।