नीमच। जिले में अफीम किसानों ने डोडों में चीरा लगाना शुरू कर दिया है। अफीम काश्तकारों ने सर्वप्रथम खेतों तक पहुंचकर शुभ मुहूर्त में मां कालिका की पूजा-अर्चना की। इसके उपरांत परंपरागत तरीके से डोडो में चीरा लगाया। इस चीरा लगाने की प्रक्रिया के साथ ही अब किसानों का अधिकतर समय खेतों में ही बितेगा। अफीम के डोडो की सुरक्षा के लिए किसानों ने पहले से ही खेतों में डेरा डाल रखा है। डोडा में चीरा लगाया तो अब खेतों की निगरानी में और सतर्कता बरतेंगे।
उल्लेखनीय है कि नीमच जिला अफीम उत्पादक जिला है। जिले में बड़े पैमाने पर किसान अफीम की खेती करते हैं। वित्त मंत्रालय से जारी गाइड लाइन के अनुसार इस वर्ष भी नीमच सहित आसपास के मंदसौर व चित्तौड़गढ़ जिले में किसानों ने अफीम की खेती है। वर्तमान में अफीम के खेतों में डोडे आ चुके हैं। अब इन डोडों में चीरा लगाने का दौर भी शुरू हो गया है। अफीम काश्तकार अपने-अपने खेतों तक पहुंचकर शुभ मुहूर्त में मां कालिका की पूजा-अर्चना कर डोडों में चीरा लगा रहे हैं। नारकोटिक्स विभाग की निगरानी में डोडों से निकलने वाली अफीम का आगामी महिनों में तौल होगा।
तस्करों की नजर काले सोने पर, बंदूक के साये में कर रहे निगरानी-
अफीम के खेतों में आए डोडों पर चीरा लगाने के साथ ही किसानों की चिंता और बढ़ गई है। अफीम किसान मांगीलाल पाटीदार की मानें तो डोडों में चीरा लगाने के साथ ही तस्करों की नजर भी काले सोने पर पड़ने लगती है। ऐसी स्थिति में दिन-रात खेतों की निगरानी करती पड़ती है। रात्रि के समय में भी टोलियां बनाकर व बंदूकों के साथ खेतों की निगरानी करते हैं। पूर्व में भी कई किसान भाईयों के खेतों से अज्ञात चोरों ने डोडे चोरी किए थे। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए अब खेतों पर आशियाना बनाया है।