मनासा। श्री परशुराम सेना सकल ब्राह्मण समाज द्वारा आज मनासा में महामहिम राष्ट्रपति के नाम अनुवभागीय अधिकारी पवन बारिया को संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान जो लेकर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि भागवत द्वारा पंडितों पर जातियाँ बनाने का आरोप लगाकर देश में पंडितों के विरुद्ध अन्य जातियों को भड़काने वाले बयान की और आकर्षित करना चाहता है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनेकों बार नेताओं के नफरती भाषणों पर रोक लगाने और पुलिस द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर कड़ी कार्यवाई किये जाने का निर्देश दिया है। फिर भी भागवत द्वारा जातियाँ बनाने हेतु पंडितों को आरोपित करना, जानबूझ कर देश की अन्य जातियों को पंडितों के विरुद्ध भड़काने, उकसाने का प्रयास है। जबकि पूरा देश जनता है कि पंडित सदैव कड़ी मेहनत से अर्जित ज्ञान के द्वारा समाज की रक्षा करते रहे हैं, प्राणियों में सदभावना हो, विश्व का कल्याण हो, वसुधैव कुटुम्बकम जैसे सर्व हितकारी शब्द पंडितों ने ही समाज को दिये हैं।
ज्ञापन में आगे कहा गया कि स्वतंत्रता संग्राम हो या युद्ध का मोर्चा हो, पंडितों ने सदैव सर्वोच्च त्याग और बलिदान देकर देश और समाज के प्रति अपना समर्पण सिद्ध किया है। पंडित समाज सृष्टि के संचालन में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यह सब जानते हुए भी पंडितों पर आरोप लगाना दुर्भावना को दर्शाता है। इसी तरह समाजवादी पार्टी के नेता एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व केबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा भी हिन्दू धर्म पवित्र की रामचरित मानस पर प्रश्न उठायें गये है। जोकि अनुचित और गलत है।
श्री परशुराम सेना सकल ब्राह्मण समाज मनासा इस ज्ञापन के माध्यम से संघ प्रमुख मोहन भागवत एवं स्वामी प्रसाद मौर्य के इन कृत्यों का घोर विरोध करता है, एवं इनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाई की माँग करता है, जिससे कोई भी अन्य नेता पंडित, ब्राह्मण समाज एवं हिन्दू धर्म ग्रंथों के खिलाफ भड़काऊ और नफरती भाषण देने का साहस न कर सके और सामाजिक समरसता बनी रहे।