नीमच। भारतीय अफीम किसान संघर्ष राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की दिनांक 12 फरवरी रविवार नीमच कृषि मंडी प्रांगण में अफीम किसानों की अति आवश्यक मीटिंग रखी गई है।
भारतीय अफीम किसान संघर्ष समिति के संरक्षक मांगीलाल मेघवाल बिलोट ने जानकारी देते हुए बताया कि उक्त बैठक में लुवाई चिराई पद्धति और सीपीएस पद्धति को लेकर विशेष चर्चा की जाएगी। साथ अफीम किसानो को हो रही अन्य परेशानियां, ओलावृष्टि से हुए नुकसान आदि को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
मांगीलाल मेघवाल बिलोट ने बताया कि सरकार में बैठे जनप्रतिनिधि और एसी में बैठे बड़े अधिकारियों ने सीपीएस पद्धति किसान पर जबरदस्ती थोप दिया। जबकि किसानों ने कभी भी सीपीएस नहीं मांगा। किसानों के देश में तथाकथित बुद्धिजीवी किसान नेता किसानों की सहमति से बिना अफीम खेती की नीति थोक दिया हैं।
भ्रष्ट अधिकारी लाखों करोड़ों रुपए किसानों से लूट लेते हैं। अफीम घटिया नहीं अधिकारी घटिया है। किसानों में एकता का अभाव का नाजायज फायदा भ्रष्ट अधिकारी, दलाल मुखिया के माध्यम से वसूली करते हैं। दवा कंपनियां किसानों की गाढ़ी कमाई को खाकर हजम करना चाहती है जबकि आजादी से आज तक किसान लुवाई चिराई के माध्यम से परंपरागत अफीम खेती औषधीय उत्पाद के रूप में अफीम खेती करते आया है। भारत सरकार को नारकोटिक्स विभाग की जमीनी हकीकत और अफीम किसानों की पीड़ा पहुंचाने हेतु अपने परिवार से सिर्फ और सिर्फ एक सदस्य को 12 फरवरी रविवार नीमच कृषि मंडी प्रांगण में भेजने का समय अवश्य निकालें और अवश्य भेजें।