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February 24, 2023, 2:53 pm
BIG NEWS : मार्च में राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के किसान प्रतिनिधियों का अफीम किसान सम्मेलन नीमच में प्रस्तावित, पांच बिंदुओं पर होगी चर्चा, पढ़े खबर

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चित्तौड़गढ़। अफीम एकमात्र औषधिय उत्पाद है जिससे 400 प्रकार की जीवन रक्षक दवाइयां बनती है और इतना ही देश को विदेशी मुद्रा किसानों को रोजगार और मरीजों को सस्ती दवा सुलभ करने का एकमात्र कृषि उत्पाद है उसके बावजूद भी कुछ भ्रष्ट अधिकारी षडयंत्र पूर्वक भारत के विश्व प्रसिद्ध बढ़िया अफीम को घटिया करके निजी कंपनी बजाज हेल्थ केयर को सीपीएस की आड़ में किसान को कंपनी का गुलाम बनाने के षड्यंत्र के खिलाफ विशाल अफीम किसान सम्मेलन नीमच में प्रस्तावित है जिसके प्रमुख पांच बिंदु हैं-

1- 1997-98 में काटे सभी अफीम पट्टे बहाली दूसरे शब्दों में अफीम खेती कर चुके सभी किसानों को अफीम खेती करने के लाइसेंस दिया जाए। 
2- जिन खेतों में अफीम फसल खड़ी है सीपीएस की आड़ में बिना लुवाई चिराई के रबड़ की पॉलिसी जारी की है उन सभी किसानों को लुवाई चिराई के अफीम पट्टे दिया जाए। 
3- चिराई लुवाई से अफीम पैदा कर रहे सभी किसानों को अफीम का अंतरराष्ट्रीय मूल्य किसानों को दिया जाए। 
4- अफीम पॉलिसी का निर्धारण नेता और अधिकारीयों से नहीं किसान प्रतिनिधियों की सहभागिता से बनाई जाए।
5- अफीम एक औषधिय उत्पाद है जिसको निजी कंपनी के हाथ में जाने से हर हाल में रोका जाए।

संघर्ष समिति के सरंक्षक मांगीलाल मेघवाल बिलोट ने बताया कि सरकार सीपीएस की आड़ में निजी कंपनी को अफीम फसल का ठेका दे रही है तो सरकारी कंपनी को क्यों नहीं दिया जा रहा है, और सरकार किसानों का भला करना चाहती है तो रात के अंधेरे में तीर क्यों चला कर किसानों को बर्बाद कर रही है दिन के उजालों में किसान की सहभागिता से अपनी अफीम पॉलिसी क्यों नहीं बनाई जाती है। दूसरी बात सीपीएस से कैसे और किस आधार पर नशा कम होगा जबकि सच तो यह है अफीम से नशा नहीं दवाईयां बनती है नशे की दिशा में नारकोटिक्स विभाग किसान को जबरदस्ती धकेल रहा है दोषी किसान नहीं दोषी तो दल्ले दलाल व दलाल मुखिया और भ्रष्ट अधिकारी ही हैं आम अफीम किसान 1 दोषी नहीं है 
किसान भाइयों जागो अफीम घटिया नहीं अधिकारी घटिया है किसानों के देश में किसानों को अपने ही खेत में निजी कंपनियों का गुलाम बनाने का जो सोचा समझा षड्यंत्र है उसके खिलाफ आवाज को बुलंद किया जाए।

सोशल मीडिया के जरिए राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के सभी किसानों को जगा कर सदस्यता अभियान को सफल बना कर मार्च में एक बुलंद आवाज सरकार तक पहुंचा कर किसानों को आर्थिक आजादी के लिए परंपरागत अफीम खेती को बचाया जाए।
 

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