खरगोन। शहर के बीच से गुजरने वाले डायवर्सन रोड़ पर गोल्डन शॉवर ट्री पूरे शहर की शोभा बढ़ा रहा है। जो भी इस मार्ग से गुजर रहा है वो इसकी चमकीली व मखमली चमक से रूबरू हो रहा है। यहां यह अकेला अमलतास भरी धूप और उच्च तापमान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए शीतलता का अहसास करा रहा है। दूर से गोल्डन की तरह दिखने वाले इस पेड़ की खूबियों से बहुत कम लोग परिचित होंगे। लेकिन इसकी सुंदरता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर जाती है। इंग्लिश में इसे गोल्डन शॉवर, हिंदी और उर्दू में अमलतास, संस्कृत में व्याधिघात, मराठी में बहावा व कर्णिकार, गुजराती में गर्माष्ठो, बांग्ला में सोनालू और तामिल में कोंडारो के नाम से जाना जाता है। भारत में इसे इंडियन रेन इंडिकेटर ट्री के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि इसके फूल खिलने के 45 दिनों बाद बारिश निश्चित रूप से होती है। अमलतास की अपनी एक अलग विशेषता भी है। हमारे देश में अधिकांश पेड़ और पौधों पर बसंत ऋतु में फूलों और पत्तियों पर रंगों की बहार होती है। लेकिन अमलतास इसी ऋतु में अपने पत्ते गिरा देता है और वैशाख में शीतलता देता है।
आयुर्वेद में होता है भरपूर उपयोग-
जिला आयुष अधिकारी ड़ॉ. वासुदेव आसलकर ने बताया कि अमलतास के फूल, गुदा, छाल और बीजों को औषधीय रूप में भी काम में लाया जाता है। यह 37 गुणों से भरपूर होता है। इसका उपयोग कब्ज़/दस्त, त्वचा रोगों में तथा प्राचीन काल से घरों में खटिया में सिरहाने की ओर लगाकर रखते आये है। ताकि डरावने सपने न आये व मानसिक रोगियों को नींद में आराम मिलें।
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