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April 28, 2023, 11:47 am
KHABAR : खुशियों की दास्तां- जनजातीय ग्रामीण मांगू डोडियार शासन की योजना से कर रहे हैं बड़े पैमाने पर मत्स्य उत्पादन, पढ़े खबर 

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रतलाम। शासन की योजनाओं की मदद से जिले के ठेठ आदिवासी अंचल बाजना के जनजातीय ग्रामीण गरीबी से निकलकर समृद्धि हासिल कर रहे हैं। बाजना से 2 किलोमीटर दूर ग्राम आम्बापाडा कला के जनजातीय ग्रामीण मांगू पिता ओंकार डोडियार शासन की योजना की मदद से बड़े पैमाने पर मत्स्य उत्पादन करके आर्थिक रूप से मजबूती की ओर बढ़ चले हैं।मांगूजी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ उठाते हुए अपने गांव में रि-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम का निर्माण किया है जिसके द्वारा मछली पालन करके मांगीजी आकर्षक आमदनी अर्जित कर रहे हैं।

परंपरागत आदिवासी किसान होने के नाते 52 वर्षीय मांगू खेती बाडी करते आ रहे थे। अपने परिवार की आर्थिक समृद्धि का विचार आया तो प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के बारे में सुनकर जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क किया। योजना में वर्ष 2022-23 में जिला मत्स्य विभाग द्वारा मांगूजी को प्रधानमंत्री योजना के तहत रि-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम के लिए हितग्राही स्वीकृति दी गई। योजना के तहत मांगू को 30 लाख रुपए अनुदान सहायता मिली है। संपूर्ण यूनिट की कास्ट 50 लाख रुपए आई है। अनुदान राशि के अलावा शेष राशि मांगूजी ने बैंक लोन,ा अपनी जमा पूंजी तथा अन्य उधारी से एकत्र कर यूनिट का निर्माण किया है।योजना में स्वयं की भूमि पर मांगूजी ने यूनिट का निर्माण बीते वर्ष 2022 में प्रारंभ किया था। लगभग 8 माह में यूनिट बनकर तैयार हो गई। इस यूनिट में 8 सीमेंट टैंक होते हैं, प्रत्येक टैंक का साइज 90 घन मीटर का होता है। हर एक टैंक में 400 मत्स्य बीज संचित किए जा सकते हैं जिससे 400 किलोग्राम तक मत्स्य उत्पादन लिया जा सकता है।

मांगूजी ने विगत वर्ष सितंबर 2022 में 32 हजार मत्स्य बीज इंदौर से लाकर अपनी यूनिट में संचयन किया था। नियमित रूप से मत्स्य आहार तथा आवश्यक देखभाल पश्चात लगभग 8 से 9 माह में उनको 90 से 100 क्विंटल मत्स्य उत्पादन मार्च 2023 में प्राप्त हुआ। एवरेज 100 रुपए प्रति किलोग्राम के मान से मत्स्य बिक्री पर उनको लगभग 7 लाख रुपए का मुनाफा खर्च काटकर प्राप्त हुआ है। मांगू ने अपनी यूनिट में बंगाली फंगसियास प्रजाति का मत्स्य पालन कर रहे हैं। उन्होंने अब विभिन्न मत्स्य प्रजातियों का उत्पादन लेने की योजना बनाई है। इस वर्ष उनकी योजना देसी मछली के साथ ही गुजरात से लाकर झींगा पालन करने की भी है। मांगू अपनी मछलियों को रतलाम के लोकल बाजारों के अलावा इंदौर और मंदसौर तक पहुंचाते हैं। इंदौर और मंदसौर के व्यापारियों से उनका अनुबंध है। रि-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम की खासियत यह है कि उसमें कम पानी में मछली उत्पादन हो जाता है क्योंकि पानी के फिल्टर की सुविधा रहती है। सिस्टम प्रारम्भ करने से पूर्व मांगूजी ने हरदा जाकर वहां इस प्रकार की गतिविधि का अध्ययन किया एवं कार्य सीखा था।जिले के इस आदिवासी अंचल बाजना में एक उन्नत मत्स्य पालक किसान के रूप में मांगूजी अन्य आदिवासी किसानों को भी समृद्धि की दिशा दिखा रहे हैं, उनसे प्रेरणा लेकर अन्य कृषक भी इसी प्रकार की आय उत्पादक गतिविधियों को नवाचार के रूप में अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।

मांगूजी एक सफल मत्स्य उत्पादक के तौर पर स्थापित हुए हैं, वह अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की योजना को देते हैं। मांगू जी के परिवार में 3 पुत्र हैं, एक पुत्री का विवाह किया जा चुका है। उनके कार्य में उनके पुत्र भी हाथ बंटाते हैं।
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