धार। जिले के किसान भाईयों से अपील की गई है कि वर्षा की खेच अधिक होने से खरीफ सीजन की सोयाबीन एवं अन्य फसलें मुरझा रही है। वर्तमान में सोयाबीन फसल अन्तर्गत जल्दी पकने वाली किस्मों में फल्लियो में दाने भरने की आवस्था में है। मध्यम अवधि वाली किस्म या लम्बी अवधि वाली किस्मे फुलावस्था में है। वर्तमान मे फसलों में नमी का होना आवश्यक है।
सहायक संचालक कृषि संगीता तोमर ने किसानों को सलाह दी है कि भूमि में नमी बनाये रखने हेतु किसान भाई ये उपाय करें जैसे सिचाई साधन की उपलब्धता होने पर फसलों में स्प्रिंकलर, ड्रिप, रेनगन आदि से सिंचाई करने पर पौधों में रन्ध्र (स्टोमेटा) के माध्यम से पानी का अवशोषण तेजी से बढ़ेगा एवं फसल सुरक्षित रहेगी। फूल या फल्लियो मे दाने भरने की स्थिति में यदि भूमि दरार आने की प्रारम्भिक अवस्था ही सिंचाई करें। जिन किसानो के पास पर्याप्त मात्रा में पानी की उपलब्धता होने पर सतही सिंचाई सायंकाल से लेकर प्रातः काल तक की अवधि में सिंचाई करना लाभदायक होगी। खरीफ फसलो मे जैसे सोयाबीन, मक्का कपास, अरहर, सब्जीवर्गीय एवं फलदार पौधों मे सुखे से निपटने के लिए घास या गेहूं भूसा आदि कतारों के बीच बिछाये जिससे भूमि में नमी संरक्षण लम्बे समय तक बना रहेगा । थायो यूरिया 500 लीटर पानी मे 375 ग्राम प्रति हेक्टर की दर से फसल पर छिडकाव करने से लाभ होगा। पोटेशियम नाइट्रेट 5 किग्रा. 500 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिडकाव करने से पौधों मे सुखा सहन करने की क्षमता बढ़ेगी।