जावरा। जन चेतना मंच अध्यक्ष सुजान कोचट्टा, महामंत्री जगदीश राठौर पत्रकार एवं कार्यालय सचिव अंबालाल चौधरी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि रतलाम जिले की आलोट एवं ताल तहसील को जबरन प्रस्तावित नागदा जिले में शामिल नहीं करते हुए वर्तमान रतलाम जिले में ही इन दोनों तहसीलों को शामिल करने की घोषणा करें। क्योंकि जन भावना के अनुरूप लाखों नागरिकों द्वारा प्रस्तावित जावरा जिले में ताल एवं आलोट तहसील शामिल की गई है।
कोचट्टा, राठौर व चौधरी के साथ ही संघर्ष समिति कार्यकारी अध्यक्ष सुदेश खारीवाल, संयोजक प्रकाश बारोड, एडवोकेट वरुण क्षेत्रीय, उपाध्यक्ष शेखर नाहर, हीरालाल मेहता व भगवान दास बैरागी, संघर्ष समिति कार्यालय सचिव अभय श्रीवास्तव, संगठन सचिव असलम मेव, संगठन सहसचिव गणेश धाकड़ व अशोक औरा (जैन) कार्यालय सहसचिव विनोद मेहता, कोषाध्यक्ष नरेंद्र मकवाना ने जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत 20 जुलाई 2023 को नागदा में सार्वजनिक रूप से नागदा जिला बनाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा था कि प्रस्तावित नागदा जिले में किसी भी तहसील को जबरन शामिल नहीं किया जाए किंतु मुख्यमंत्री की घोषणा की विपरीत 48 घंटे के भीतर ही रतलाम जिले की दो तहसील ताल एवं आलोट को जबरन शामिल कर लिया गया। शासन द्वारा जारी अधिसूचना मे प्रस्तावित नागदा जिले के लिए 28 अगस्त तक आपत्ति दर्ज करने की समय सीमा निर्धारित की गई थी। निर्धारित समय सीमा में जन चेतना मंच जावरा सहित करीब 2 हजार आपत्ति दर्ज की जा चुकी है। इन आपत्तियों का निराकरण 2 सप्ताह व्यतीत होने के बावजूद नहीं हुआ है। नागदा जिले की घोषणा के पश्चात मेहर, पांढुर्णा एवं चाचोडा जिले की घोषणा हो गई और घोषणा के तुरंत पश्चात ही अधिसूचना जारी हो गई। लेकिन जिस तत्परता से अधिसूचना जारी होती है उसी तत्परता से आपत्तियों का निराकरण होकर सार्वजनिक घोषणा होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
जन चेतना मंच जावरा के पदाधिकारीयों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि 25 वर्षों से नागरिकों द्वारा की जा रही जावरा जिले की मांग चुनाव आयोग द्वारा चुनाव आचार संहिता की घोषणा के पूर्व ताल एवं आलोट तहसील को प्रस्तावित जावरा जिले में शामिल करते हुए अति शीघ्र जावरा जिला बनाने की घोषणा की जाए।