मंदसौर। एक ऐसे दुर्लभ संत जो कि निर्भीक और सरल दिव्य भाव को लेकर अपना राष्ट्र और मानव मात्र के लिए जीवन-यापन करते हैं, उनके द्वारा 100 से अधिक शिवपुराण, राम कथा, श्रीमद्भागवत एवम देवी भागवत कथा हो चुकी है, वे कथा लोगों को प्रभावित करने के लिए नहीं बल्कि भगवान को प्रभावित करने के लिए और भगवान के माध्यम से लोगों के जीवन को प्रभावित करने के लिए सुनाते हैं। ऐसे दिव्य मनीषी संत रतलाम में पिछले 1 माह से दिहार कर रहे हैं जिनका ज्ञान और धर्म विज्ञान दोनों ही वेदसम्मत शास्त्रसम्मत और भारतीय ऋषि परंपरा के अनुकूल है। शालाम के कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट और शिव आराधना सेवा समिति के तत्वावधान में अधिकमास एवम श्रावण मास के उपलक्ष्य में नौ दिवसीय शिव पुराण कथा का अपने दिव्य मुखारविंद से वाचन करने आए. ऐसे तपोमूर्ति वीतराग शिरोमणि परम पूज्य स्वामी निर्मल चौतन्यपुरी जी महाराज एक प्रखर एवं ऊर्जावान सन्यासी के रूप में नैतिक जीवन और आचरण के धनी है, उनके दिव्य मुखारविंद से मूल कथाओं का रसपान रतलाम की धर्म प्रेमी जनता को कराया जा रहा है, उनके स्पष्ट और मूल कथा के दर्शन को सुनाने की शैली से प्रभावित होकर उन्हें अखंड ज्ञान आश्रम में भी शिवपुराण कथा के लिए आमंत्रित किया गया था और फिर कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट और शिव आराधन सेवा समिति के द्वारा उनसे राम कथा का पाठ भी करवाया गया जिसका विश्राम पूर्णाहुति 4 अगस्त को किया गया ।।
स्वामी जी महाराज वेदांत दर्शन में एम.ए. के साथ एक प्रखर चिंतक एवं राष्ट्रवादी साधक के रूप में पूजनीय है उनके द्वारा उत्तराखंड एवं भारत के मुख्य हिस्सों से लेह लद्दाख और नेपाल की पदयात्रा पहले की जा चुकी है और स्वामीजी माँ नर्मदा मैया कि 3 बार लगभग 20000 किलोमीटर की पदयात्रा से परिक्रमा कर चुके है, और अब एक महान उद्देश्य को लेकर स्वामी निर्मल चैतन्यपुरी जी महाराज सा संपूर्ण भारत की पदयात्रा कर राष्ट्रीय एकता एवं समरसता, पर्यावरण संरक्षण, युवा जागरण, संस्कृति के पुनरुत्थान व जन-जन के मन से वैमनस्यता खत्म हो और आध्यात्मिकता का विकास हो साथ ही धर्मशील होकर हर भारतीय एक सफल और सुसंस्कृत जीवन भगवान के अनुसार यापन कर सके इस महान संदेश को लेकर स्वामी निर्मल चैतन्यपुरी जी महाराज पूरे भारत की भूमि और मिट्टी को नमन करना चाहते हैं । भारत के हर भाषा प्रांत के हर वर्ग के हर स्तर के हर धर्म के व्यक्ति तक भारतीय दर्शन सर्वे भवंतु सुखिन: और सभी को धार्मिक रूप से संपन्न बनाकर सफल जीवन जीने की प्रेरणा देना चाहते हैं। इस हेतु स्वामी जी महाराज 25 अक्टूबर 2023 को दक्ष मन्दिर कनखल, हरिद्वार से इस यात्रा का शुभारंभ करेंगे और इस महान संदेश के साथ हरि नाम संकीर्तन करते हुए पूरे भारत की पदयात्रा करेंगे। जहां-जहां उनका विश्राम होगा वहां भजन संकीर्तन और प्रवचन के द्वारा लोगों को इस उद्देश्य से जोड़ा जाएगा, स्वामी जी महाराज के हरिनाम संकीर्तन की महत्वपूर्ण प्रेरणा चैतन्य महाप्रभु जी एवम नर्मदा तट के पूजनीय महादेव चैतन्य गुरु महाराज जी है। और उनके वेद शास्त्रों के अध्ययन उपनिषदों के अध्ययन से उनको यह प्रेरणा मिली कि भारत की भूमि पूज्यनीय मिट्टी को नमन करते हुए यह यात्रा होगी। इस यात्रा के लिए यात्रा के दौरान प्रत्येक राज्य के धर्म प्रेमी और राष्ट्र प्रेमी जन संगठन संस्थाएं स्वामी जी महाराज के साथ जुड़ती चली जाएंगी और उनके इस महान उद्देश्य को पूरा करने में भारत देश की भारत माता की सच्ची सेवा करने का लाभ सबको मिलता चला जाएगा, और इसका समापन उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ मेले 2028 में होगा।