नीमच। 14 सितम्बर गुरुवार की अमावस्या विशेष फलदायी है। इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या भी कहते है। इस दिन कुशा (डाभ) घर पर लाई जाती हैं। जिसका वर्ष भर यज्ञ, पूजा-पाठ, देव-पितृ कार्य, ग्रहण काल आदि कार्य में उपयोग होता है। इस दिन कालसर्प दोष, नाग दोष, पितृ दोष वाले जातकों के लिए शान्ति के विशेष योग है। इस अमावस्या को पीपल का पूजन करके व्रत-स्नान, दान-पुण्य, का विशेष महत्व होता हैं।ज्योतिष एवं कर्मकान्डीय मानव सेवा परिषद (रजि) जिला नीमच के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पं दशरथ शास्त्री ने बताया कि समस्त सनातन धर्मावलंबीजन इस विशेष महत्व से युक्त कुशोत्पाटिनी अमावस्या पर दान-पुण्य, व्रत, पूजा, तर्पण करके देव एवं पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है।