ग्वालियर। आमजन के बीच मौजूद छोटे-छोटे मसले बड़े विवाद का रूप ले लेते हैं, जिससे आपसी प्रेम और भाईचारा कम होता है और अनावश्यक तनाव भी बढ़ता है। ऐसी परिस्थितियों में सामुदायिक मध्यस्थता विवादों के निराकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि छोटे-छोटे विवाद प्राथमिक स्तर पर ही सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से निराकृत किए जाते हैं, तो यह सबसे बड़ी सामाजिक सेवा होगी। इस आशय के विचार उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति रोहित आर्या ने व्यक्त किए।
प्रशासनिक न्यायाधिपति आर्या मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। विभिन्न समुदायों के चिन्हित व्यक्तियों को मध्यस्थता से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के तत्वावधान में उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति ग्वालियर द्वारा 13 व 15 सितम्बर तक कुल 20 घंटे का सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें ग्वालियर शहर के विभिन्न समुदायों के प्रतिभागीगण प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित प्रतिभागीगण को रिसोर्स पर्सन नीना खरे, शाहिद मोहम्मद तथा डॉ. श्याम बिहारी ओझा द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अवसर पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार अखिलेश कुमार मिश्र एवं रजिस्ट्रार/ओएसडी हितेन्द्र द्विवेदी तथा विधिक सहायता अधिकारी सनातन सेन उपस्थित रहे।