भौरासा। दीपावली के बाद महिलाओं के द्वारा मनाया जाने वाला पर्व भारतीय संस्कृति में अनूठी परंपरा अंतर्गत मनाया जाता है इस दिन महिलाएं सुबह सुबह अंधेरे उठकर स्नान करके एकत्रित होकर पुरानी टोकरी एवं आतिशबाजी का कचरा एकत्रित कर आग लगाकर उसमें तापती हैं।मान्यता है कि एक दिन पूर्व दीपावली पर लक्ष्मी माता के साथ कई आसुरी शक्तियां भी आती है उन्हें घर की लक्ष्मी ही सुबह सम्मान अग्नि प्रज्वलित कर विदा कर देती है।ताकि घर पर आई लक्ष्मी शुद्ध रूप से मनमस्तिक को संचालित करें ग्रामीण क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा का पर्व अब भी मनाया जाता है भोरासा के चौधरी मोहल्ले की वरिष्ठ श्रीमती प्रेमलता बाई चौधरी व रतन चौधरी का कहना है कि इस दिन नववधू बड़े बुजुर्गों के पैर पढ़ कर आशीर्वाद लेती है। इसलिए इस दिन बड़े बुजुर्गों के धोक (पैर पड़ना ) लगने से इस पर्व को धोक पड़ना भी कहते हैं सदा सुहागन का आशीर्वाद मिलते ही महिलाओं के चेहरे खिल जाते हैं। पति की लंबी उम्र के लिए यह पर्व दिवाली के एक दिन बाद हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता है और बुरी शक्तियों को जलाकर नष्ट कर दिया गया आज भी यह परंपरा कई मान्यता लिए पूरे जोर-शोर से मनाई जा रही है नववधू ने बताया कि इस पर्व में सभी बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलता है।भारतीय संस्कृति में ऐसी परंपरा रहने से एक दूसरे का सम्मान करने का अवसर भी मिल जाता है महिला शक्ति में शामिल महिलाओं ने बताया कि यह परंपरा वर्षों वर्ष पुरानी है जो विरासत में बुजुर्गों द्वारा हमें दी गई है इस पर्व से सास बहू नंनद भाभी देवरानी जेठानी में आपसी प्रेम बनता है।