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June 30, 2026, 7:52 pm
BIG NEWS : कृषि मंडी पिपलिया में टोकन सिस्टम से कैश काउंटर आवंटन पर सवाल, 1.77 करोड़ के निर्माण की जांच की मांग, किसान नेता ने लगाया निर्माण कार्य में अनियमितता का आरोप, पढ़े रवि पोरवाल की खबर  

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पिपलिया मंडी। कृषि उपज मंडी पिपलिया में हाल ही में 23 वर्ष पुराने किसान शेड पर बनाए गए 32 नए कैश काउंटरों के निर्माण एवं उनके आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

मंगलवार को किसान नेता श्यामलाल जोकचंद मंडी पहुंचे और मौके पर पूरे मामले का निरीक्षण किया। उनके साथ मंडी के पूर्व अध्यक्ष बंशीलाल पाटीदार भी मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद जोकचंद ने प्रदेश सरकार एवं मंडी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की।

जोकचंद ने आरोप लगाया कि कैश काउंटरों का आवंटन पारंपरिक खुली नीलामी प्रक्रिया के बजाय टोकन सिस्टम के माध्यम से किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि सामान्यतः मंडी की दुकानों एवं व्यावसायिक परिसरों का आवंटन नीलामी के माध्यम से किया जाता है, जिससे मंडी को अधिकतम राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में टोकन प्रणाली अपनाने का आधार क्या रहा, इसकी जांच आवश्यक है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 23 वर्ष पुराने जर्जर भवन पर केवल रंग-रोगन कर उसे नया दर्शाते हुए लगभग 1 करोड़ 77 लाख रुपये का निर्माण कार्य किया गया है। उनका कहना है कि जिस भवन को पहले असुरक्षित मानकर ध्वस्त करने की योजना थी, उसी पर भारी राशि खर्च करना समझ से परे है।

किसान नेता ने सवाल उठाया कि क्या निर्माण से पूर्व भवन का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया गया था, और यदि कराया गया तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि किसानों और जनता को यह जानने का अधिकार है कि करोड़ों रुपए खर्च करने से पहले वैज्ञानिक परीक्षण किया गया या नहीं।

जोकचंद ने यह भी कहा कि कृषि उपज मंडी को भविष्य में गुड़भेड़ी बड़ी स्थित नए परिसर में स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है, ऐसे में पुराने परिसर में स्थायी कैश काउंटरों पर इतनी बड़ी राशि खर्च करने का औचित्य क्या है।

पूर्व मंडी अध्यक्ष बंशीलाल पाटीदार ने भी निर्माण कार्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई मंडी का निर्माण अंतिम चरण में है, ऐसे में पुराने परिसर में भारी खर्च वित्तीय दृष्टि से उचित नहीं है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रदेश के उपमुख्य मंत्री जगदीश देवड़ा और सांसद सुधीर गुप्ता ने 1.77 करोड़ रुपये की लागत से बने 32 कैश काउंटरों का लोकार्पण किया था। इसके बाद से ही निर्माण गुणवत्ता, आवंटन प्रक्रिया और वित्तीय उपयोग को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।

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