खरगोन। गाय केवल पूजा के लिए नहीं है, बल्कि वह घर के संपूर्ण दुख, दारिद्रय को समाप्त कर श्री समृद्धि की वृद्धि करने वाली है। गाय के दूध में अमृत होता है। गाय के दूध का सेवन करने से बच्चों की बुद्धि प्रखर बनती है। इसलिए कहना उचित ही होगा कि जैसा दूध वैसा पूत। यह बात देवग्राम धरमपुरी-बोरावां में नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा के चतुर्थ दिवसीय आयोजन में गायत्री धाम सेंधवा से आए वरिष्ठ गायत्री परिजन एवं गौ सेवक मेवालाल पाटीदार ने कही। वे गौ पालन एवं जैविक कृषि आधारित किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए गौ पालन के पूर्व उसके ज्ञान -विज्ञान से आमजन को रूबरू करा रहे थे।
गौ पुत्र मेवालाल पाटीदार ने बताया कि पुराने समय में गाय का गोबर, गौमूत्र खेत में जाता था तो बंपर उत्पादन होता था और खेतों की तासीर हमेशा उर्वरक बनी रहती थी। परंतु जब से हमने खेती में उर्वरकों का इस्तेमाल करना शुरू किया है दिनों-दिन जमीन बंजर होती चली जा रही है। इसका दुष्परिणाम यह है कि आज खान-पान के साथ हवा भी प्रदुषित हो गई है। इसलिए आज हमें वापस ऋषि कृषि, जैविक खेती के साथ ही गौ पालन की ओर लौटना होगा।
पंडित मेवालाल पाटीदार ने भारतीय संस्कृति के पांच आधारभूत स्तंभों में गाय को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने गाय के गोबर में लक्ष्मी का वास, गौ दुग्ध में सरस्वती का और गाय के घी में सूर्य भगवान का वास बताया। इसलिए उन्होंने खेती और घर परिवार को समृद्ध और खुशहाल बनाने हर किसी को गौ माता की जय बोलने की बजाय गौ सेवा का संकल्प दिलाया।
किसान सम्मेलन के इस आयोजन कि संचालन ग्राम अहिल्यापुरा के युवा किसान एवं गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकर्ता बलीराम पटेल ने किया। आभार प्रदर्शन ग्राम रूपखेड़ा के कृषक एवं वरिष्ठ गायत्री परिजन रामलाल पटेल ने किया। किसान सम्मेलन में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों किसान बंधु एवं माताएं-बहनें उपस्थित हुईं।