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February 18, 2024, 5:57 pm
BIG NEWS : दिल्ली में किसान आंदोलन और मालवा-मेवाड़ में ब्लैक गोल्ड पर संकट, अब सरकार को कैसे देंगे अन्नदाता काला सोना, अफीम के खेतों से सामने आई किसानों के दर्द की रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीरें, पढ़े अब्दुल अली ईरानी के साथ महावीर सैनी की खबर

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नीमच। जिले के खेतों में खड़ी अफीम की फसल इस बार मौसम की प्रतिकूलता के चलते खराब होने की कगार पर पहुंच गई है। खेतों में खड़ी अफीम की फसल में डोडे व फूल तो आ चुके हैं, लेकिन चीरा लगाने की प्रक्रिया से पहले ही डोडों में काला रोग भी दिखने लगा है। डोडे पूरी तरह से काले पड़ चुके हैं। वहीं पत्तों में भी सिकुड़न के साथ पीलापन आ गया है। इस रोग की वजह से अफीम काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। 

रात-दिन कर रहे खेतों की निगरानी-
ब्लैक गोल्ड यानी अफीम की फसल इन दिनों पूरे शबाब पर है। अफीम किसान अपने-अपने खेतों में रात दिन डोडों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं अफीम के खेतों में चिराई लुनाई का काम भी जोरों पर चल रह है। सुबह 7 से करीब 9ः30 बजे तक लुनाई का और दिन में सुबह 11 से शाम 4 बजे तक चिराई का काम चल रहा है। रातों को खेतों में सुरक्षा के लिए परिवार और मजदूरों के साथ काश्तकार पहरा दे रहे हैं। 

किसानों को सता रहा ये डर-
जिले के अधिकतर खेतों में खड़ी अफीम की फसल में रोग आ गया है। डोडे काले पड़ने व पत्ते पीले पड़ने के कारण डोडों में रस आना बंद हो गया है। अब किसानों के सामने ये संकट खड़ा हो गया है कि वे इसी स्थिति में डोडों में चीरा लगवाए या फसल को हंकवा दें। किसानों की मानें तो यदि वे चीरा लगवाते हैं तो औसत अफीम नहीं दे पाएंगे और औसत नहीं दे पाए तो पट्टा कटने का डर रहेगा। 

1 से 1.5 लाख तक हो चुके हैं खर्च-
ग्राम भरभड़िया के किसान कय्यूम मंसूरी, इकबाल मंसूरी और शाकीर मंसूरी ने बताया कि अफीम की फसल में अब तक वे 1 से 1.5 लाख रूपये से अधिक की राशि खर्च कर चुके हैं। दवाई छिड़काव में भी हजारों रुपए का खर्च करने के बाद भी उनकी फसल में रोग लग गया है। मौसम की मार की वजह से यह स्थिति बनी है। काश्तकारों के अनुसार यह स्थिति लगभग आधे किसानों के साथ हुई है।  

वॉईस ऑफ एमपी के सामने छलका दर्द-
वॉईस ऑफ एमपी की टीम ने आज रविवार को जिले के खेतों में खड़ी अफीम की खेती का जायजा लिया और किसानों से चर्चा की। इस दौरान किसानों का दर्द कैमरे के सामने छलक उठा। किसानों ने बताया कि उन्होंने बच्चों की तरह अफीम की फसल को बढ़ा किया। बावजूद डोडों में कालापन आ गया। अब वे चीरा लगाने को लेकर भी संशय में है। अफीम काश्तकारों ने सरकार से अफीम की खेती को बीमा पॉलिसी में लाने और खराब होने की दशा में उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। साथ ही फसल खराब होने के चलते औसत में राहत प्रदान करने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया है।

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