चित्तौड़गढ़। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय भील सेना के बैनर तले भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में भील एवं आदिवासी समाज के लोग, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजजन शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं, अधिकारों और सामाजिक एकता को मजबूत करने के साथ समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करना रहा।
कार्यक्रम का नेतृत्व राष्ट्रीय भील सेना के संयोजक गोपाल भील आकोड़िया एवं राष्ट्रीय सहसंयोजक सुनील चौहान भील, निम्बाहेड़ा ने किया। आयोजकों ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस समाज की संस्कृति, इतिहास, संघर्ष, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों को समझने तथा नई पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़ने का अवसर है।
उमंग सिंघाड़ ने ऑनलाइन किया संबोधित-
मौसम खराब होने के कारण मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघाड़ कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने जूम मीटिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर सभा को संबोधित किया। उन्होंने आदिवासी समाज की एकता, शिक्षा, अधिकारों एवं सामाजिक विकास पर विचार रखते हुए युवाओं से शिक्षा और जागरूकता के साथ आगे आने का आह्वान किया।
गोपाल दास जी महाराज ने वीडियो संदेश से दी शुभकामनाएं
मथुरा से गोपाल दास जी महाराज ने वीडियो संदेश के माध्यम से समाजजनों को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
विधायक थावरचंद डामोर ने शिक्षा और संगठन पर दिया जोर
कार्यक्रम में धरियावद विधायक थावरचंद डामोर ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति के लिए शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता जरूरी है। उन्होंने युवाओं से सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने तथा समाज को एकजुट करने की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही विधानसभा में समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाने की बात कही।
भील समाज के विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क कॉलेज की पहल पर जोर
राष्ट्रीय संयोजक गोपाल भील आकोड़िया ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय भील सेना को मजबूत करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करना भी है। उन्होंने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए भील समाज के विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क महाविद्यालय खोलने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार और अधिकारों के लिए संगठन को गांव-गांव तक मजबूत किया जाएगा।
राष्ट्रीय सहसंयोजक सुनील चौहान भील ने समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि समाज अपने अधिकारों और भविष्य के लिए एकजुट होकर आगे बढ़े। उन्होंने शिक्षा, संगठन एवं सामाजिक एकता को समाज की मजबूती का आधार बताया।
आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की दिखी झलक-
कार्यक्रम स्थल पर आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की विशेष झलक देखने को मिली। समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। आदिवासी लोक संस्कृति और सामूहिक एकता ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। कार्यक्रम में युवाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और आदिवासी अधिकारों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
आयोजकों ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि समाज को अपने अधिकारों एवं जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का अवसर है। कार्यक्रम में जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकार प्रमुख विषय रहे।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में कमलेश भील मोगरवासा एवं जिला अध्यक्ष मुकेश भील सहित कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा। समापन पर राष्ट्रीय भील सेना के पदाधिकारियों ने अतिथियों, समाजजनों, युवाओं एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। समाजजनों ने संस्कृति, एकता एवं सामाजिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।