शिवपुरी। राष्ट्रीय संत दिगंबर मुनि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपना शरीर त्याग दिया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ में शनिवार-रविवार की मध्यरात्रि 2ः35 बजे समाधि ली। रविवार दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गए। प्रदेश सरकार ने आचार्यश्री के सम्मान में आधे दिन का राजकीय शोक घोषित करते हुए सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप, संत विद्यासागर के समाधि कार्यक्रम में शामिल हुए। यह समाचार सुनते ही समस्त जैन समाज ही नहीं अन्य समाजों में भी शोक लहर दौड़ गई बामौरकलॉं में जैन समाज व सभी समाज लोगों ने अपने प्रस्थान बंद करके अन्य समाजों के साथ मिलकर श्रद्धांजलि अर्पित की आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के समाधि की खबर से बामौरकलॉं सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। लोग विद्यासागर महाराज के सानिध्य और प्रदेश में जहां-जहां उन्होंने प्रवास किया उन दिनों को याद कर रहे हैं। प्रदेश के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। एमपी के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ समेत कई नेताओं ने दुख जताया है। विद्यासागर जी महाराज के समाधि की खबर से बामौरकलॉं सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। लोग विद्यासागर महाराज के सानिध्य और प्रदेश में जहां-जहां उन्होंने प्रवास किया उन दिनों को याद कर रहे हैं। आचार्यश्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के बेलगांव के ग्राम सदलगा में हुआ था। उनके बाल्यकाल का नाम विद्याधर था। आचार्यश्री ने कन्नड़ के माध्यम से हाई स्कूल तक शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद वे वैराग्य की दिशा में आगे बढ़े। 30 जून 1968 को मुनि दीक्षा ली। आचार्य का पद उन्हें 22 नवंबर 1972 को मिला।