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February 20, 2024, 10:54 am
BIG NEWS : 11 वर्ष का सुरेन्द्र और जब उपर से यूं टुटी किस्मत तो सितम से सितार वादन तक का सफर, पढ़ाई की उम्र में सितार वादन कर पेट पाल रहा है सुरेन्द्र, पढ़े दिनेश वीरवाल की खबर 

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सरवानियां महाराज। शिक्षा हासिल करना किस्मत में नहीं लिखा था लेकिन मां सरस्वती के वाद्य ने जीवन जीने की राह को थोड़ा आसान कर दिया। हम बात कर रहे हैं सरे राह वाद्य यंत्र सितार बजाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले सुरेन्द्र नायक की। महज 11 साल की उम्र के इस  बालक के साथ किस्मत ने ऐसा सितम ढाया की वो एक साथ पिता के स्नेह और शिक्षा दोनों से ही वंचित हो गया और अब सुरेन्द्र अपने प्रदेश राजस्थान के शहर केकड़ी को छोड़कर गांव गांव मां ममता बाई और भाई विकास के पेट भरण के लिए सितार बजा रहा है। 
अनपढ़ सुरेन्द्र वाद्य यंत्र पर सुरीली आवाज़ में भगवान शिव के भजन गाकर उसके बदले में जो मिल जाता है उससे अपना और परिवार का पेट पाल रहा है। वर्तमान में सुरेन्द्र और उसकी मां ममता बाई तथा भाई विकास डिकेन में रह रहे हैं। सुरेन्द्र के मुताबिक उसके पिता रमेश नायक की शराब पीने की आदत के चलते आयें दिन के झगड़ो ने ममतामई मां के हाथ छीन लिए। तंगहाली के चलते उपचार के अभाव में ममता बाई दिव्यांग बनकर रह गई और पिता किसी और महिला को लेकर घर छोड़ गए। ऐसी स्थिति में परिवार के पेट भरने की जिम्मेदारी 11 वर्षीय सुरेन्द्र और विकास के कंधों पर आ गई। अब सुरेन्द्र की सुरीली आवाज़ और सितार के सुरों के वादन का संगम गांव गांव शहर शहर गुजं रहा है और यही सुरेन्द्र की रोजी रोटी है।

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