रतलाम। आयोजित जीवन जीने की कला आनी चाहिए। जावरा आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर जी की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के अंतराष्ट्रीय फेकल्टी वरिष्ठ शिक्षक अमोल वागले जी (मुंबई) ने रविवार शाम सरस्वती पुरम जावरा पर सम्पन्न हुए। व्याख्यान में उक्त बात अमोल जी ने कही। साधना, सेवा एवं सत्संग तीनों में संतुलन अपनाकर हम आनंद में रहकर समाज की एवं परिवार की जवाबदारी सरलता से निभा सकते हैं। यहीं जीवन जीने की कला है। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार जावरा द्वारा आयोजित अमोल भैया के व्याख्यान के साथ प्रश्नोत्तरी एवं सुमधुर भजनों का लाभ भी उपस्थित ज़न समुदाय को मिला। ओपन टू आल सेशन में श्रोताओं द्वारा अनेक रोचक प्रश्न पूछे गए, जिनका अमोल भैया द्वारा रोचक एवं हंसते हँसाते अंदाज में व्यापार, व्यवसाय, केरियर, पढ़ाई, जीवन के लक्ष्य, युवाओ के भविष्य, आध्यात्म, ध्यान, सत्संग, सुदर्शन क्रिया एवं जावरा में ही आयोजित होने वाले आगामी 4 दिवसीय आवासीय दिव्य समाज निर्माण कोर्स’ आदि समस्त प्रश्नों के उत्तर दिये गये। मंत्र मुग्ध करने वाले भजनों की प्रस्तुति विवेक शर्मा रतलाम द्वारा दी गयी। आर्ट ऑफ लिविंग जावरा, रतलाम, मंदसौर, ताल आलोट से उपस्थित टीचर्स कर्मठ कार्यकताओं, सीएम राईस स्कूल जावरा प्राचार्य एवं स्टाफ द्वारा अमोल भैया का स्वागत किया गया। कार्यक्रम सूत्रधार प्रशिक्षक एस एन धाकड़ एवं दीपेश मनसुखानी ने आभार प्रकट किया।