गरोठ। गोवा की तरह नजर आने वाले नदी किनारे वाला ये गांव कवला जिले के भानपुरा तहसील में स्थित है। मंदसौर जिले कि भानपुरा तहसील में स्थित कंवला गांव चंबल नदी के तट पर स्थित है। यहां चंबल का किनारा इतना चौड़ा है कि पार नजर नहीं आता है। इस मिनी गोवा में 2 बड़ी चट्टानें हैं, जो नदी के बीच किसी आईलैंड की तरह दिखाई देती हैं। इस वजह से इसका नजारा समुद्र की तरह दिखाई देता है। बारिश के दिनों में यहा टूरिस्ट का जमावड़ा लगा रहता है।
कंवला में सनसेट देखने का भी अलग ही मजा है. यह बहुत शांतिपूर्ण जगह है, जहां प्राकृतिक नजारों का दीदार कर सकते हैं। यहां दिन में कैंप लगाकर भी रुक सकते हैं। चंबल नदी के किनारे खूबसूरत लहरों को टकराते हुए देख सकते हैं. गांव की आबादी क्षेत्र से दूर है। चंबल के तट पर दो विशाल शिलाखंड स्थित हैं। इन शिलखंडो में एबाबिल पक्षी के मिट्टी से बने सुन्दर घरौंदे होने के कारण इन्हें गांव में ” चिड़ी वाला पत्थर “भी कहते हैं। कंवला जून 2020 में चंबल के प्राकृतिक सौंदर्य , लहरों की अटखेलियों के दृश्य और एक नदी के तट की अद्भुत छटा लिए सामने आया था।
हालांकि ये कोई बड़े टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित नहीं हुआ है, इसलिए यहां पास में बाजार जैसी चीजें नहीं मिलेंगी. आप खाना-पीना ले जाकर पिकनिक की तरह एंजॉय कर सकते हैं। यदि आप दिल्ली से कोटा की तरफ आते हैं तो भानपुरा शहर होकर यहां आने के लिए आपको वहां से आना पड़ता है। इसके अलावा मुंबई दिल्ली के मध्य स्थित शामगढ़ रेलवे स्टेशन पर उतरकर 60 किलोमीटर ग्राम कवला मिनी गोवा जा सकते हैं। दुरी की बात करें तो मंदसौर से कंवला की दुरी 130 किमी है। भानपुरा से 15 किलोमीटर व गरोठ से 30 किलोमीटर है। भवानीमंडी से 50 किलोमीटर है।
मिनी गोवा कंवला-
गांव कंवला अभी चर्चा में है जिसका कारण है गांव में बढ़ता पर्यटन ग्राम कंवला चारो ओर से मां चंबल के आंचल से घिरा है उसी में गांव का दक्षिण पश्चिमी क्षेत्र जिस में पर्यटन कि असीम संभावनाएं है , गांव की आबादी क्षेत्र से दूर दक्षिण में चंबल के तट पर दो विशाल शिलाखंड स्थित है - इन शिलखंडो में एबाबिल पक्षी के मिट्टी से बने सुन्दर घरौंदे होने के कारण इन्हें गांव में " चिड़ी वाला पत्थर "भी कहते है , इन्हीं दो विशाल शिलाखंडो की परिधि में चंबल अपना विराट स्वरूप लिए बहती है , पश्चिमी हवा होने पर चंबल की विशाल , ऊंची ऊंची लहरें पानी स्थित चट्टानों से अटखेलिया करते हुए रेत को धकेलते हुए किनारों को आकार देती है , इस प्रकार लगातार लहरों कि मार से रेत ने जमा होकर किनारों को बीच (beach) का स्वरुप दे दिया है , यही कारण है कि आने वाले पर्यटक इसे मिनी गोवा की संज्ञा देने लगे है , दिन भर चंबल की लहरे किनारों से टकराकर अपने विराट स्वरूप का एहसास करवाती रहती है , शाम होते होते हवा के साथ कभी लहरों का जोश बढ़ जाता है तो कभी विपरीत हवा की दिशा होने पर मां चंबल शान्त होकर अपने कोमल स्वरूप को दर्शाती है , चंबल की लहरों तथा पर्यटकों के आवाजाही के बीच इन दो विशाल शिला खंडो के आसपास जीवन का ताना बाना चलता रहता है , दिन भर अपने चुजो के लिए भोजन लाते अबाबील पक्षी भी शाम होते होते घरोंदो से निकल आसमान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगातार चक्कर लगाते रहते है , सूर्यास्त के समय यह दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है एक ओर सूरज अपनी अंतिम किरणों से समस्त रोशनी उड़ेल देना चाहता है वहीं दूसरी ओर अबाबील पक्षियों का झुंड हवा के साथ आसमां से होड़ लगाते है , इस प्रकार सूर्यास्त के साथ धीरे धीरे सबकुछ शान्त होने लगता है , पक्षी अपने घोसलो में लौटने लगते है ओर ओर फिर चंबल भी शान्त हो जाती है ,अगले दिन फिर से चट्टानों से टकराने तक के लिए ... इन दो विशाल शिला खंडों में आदिमानव द्वारा लाखो वर्ष पूर्व बनाए गए शैल चित्र भी है जो मानव की विकास यात्रा , इन चट्टानों के अस्तित्व , तथा चंबल की विराट स्वरूप के साक्षी है ,
यह स्थान अत्यंत ही मनोरम है , यहां जाने हेतु आप भानपुरा से 8 कि मी दूर गांव कंवला (कोहला) में आना होगा , गांव के आबादी क्षेत्र में गांव की शुरुआत से आबादी क्षेत्र के अंतिम सिरे के बाद से कच्चा प्राकृतिक मार्ग है जो सीधा इन दो चट्टानों तक जाता जहां आप अपने परिवार सहित , दोस्तो सहित जाकर मा चंबल के अनुपम सौंदर्य का आनंद ले सकते है ...
कवंला सरपंच कंकू बाई जय सिंग गोड़ में चर्चा में बताया कि हमने कमला मिनी गोवा में आ रहे पर्यटकों को सुविधाओं के संबंध में रोड मरम्मत व विकास के लिए सांसद विधायक व आदि जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखे हैं पर उनकी ओर से ना तो कोई जवाब आया नहीं कोई सहायता दी गई है हमने जनपद से भी यहां पर आने वाले पर्यटकों के लिए चेंजिंग रूम की मांग की गई पर वह भी अभी तक पूरी नहीं हुई। लगभग 2 किलोमीटर का रास्ता बिल्कुल कच्चा है जो बारिश के समय पूरा खराब हो जाता है पंचायत द्वारा स्वयं के व्यय पर यहां मोरम डलवा कर रास्ते को दुरुस्त किया गया हैं।
नहीं है पर्यटकों के रुकने व खाने-पीने की व्यवस्था-
गांव कवलां पंचायत में मिनी गोवा में आ रहे पर्यटकों के रुकने वह खाने-पीने की कोई भी उचित व्यवस्था नहीं है यहां पर शासन स्तर पर किसी प्रकार की कोई भी सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है। कमल मिनी गोवा में काफी पर्यटक आते हैं वह यहां नहाने का आनंद लेते हैं नहाने के दौरान कोई दुर्घटना ना हो उसके लिए पंचायत की ओर से चार वॉलिंटियर रखे हैं यहां पर कोई अप्रिय घटना हो जाती है तो बचाने के उचित साधन भी नहीं है शासन स्तर पर कोई गोताखोर नहीं है ना ही कोई बोट है कोई पर्यटक ज्यादा पानी में जाए और अगर डूबने लगता है तो वहां के स्थानीय द्वारा टायर के टुप की मदद से ही बचाया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों ने नहीं दिया ध्यान-
कवला मिनी गोवा को लेकर सरपंच के कहे अनुसार सांसद विधायक व सभी जनप्रतिनिधियों से पर्यटक स्थल को लेकर कई बार कहा गया है पर अभी तक उनके द्वारा कोई सहयोग नहीं किया गया है इस संबंध में जनपद अध्यक्ष विजय पाटीदार से दूरभाष 9753752980 पर चर्चा करनी चाही लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।