नीमच। ज्ञानोदय यूनिवर्सिटी किसी प्रकार से कोई डिफाल्टर की सूची में नहीं आती है। यह कहना है यूनिवर्सिटी की चांसलर डॉक्टर माधुरी चौरसिया का। नीमच की ज्ञानोदय यूनिवर्सिटी को यूजीसी की लिस्ट में डिफाल्टर घोषित किए जाने के बाद भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी। चुंकी यह पूरा मामला लोकपाल की नियुक्ति को लेकर था। लोकपाल की नियुक्ति को लेकर यूजीसी को तथ्यात्मक सूचना देने के बाद असमंजस की स्थिति अब पूरी तरह समाप्त हो गई है।
इस संबंध में अधिक स्पष्ट करते हुए ज्ञानोदय यूनिवर्सिटी की चांसलर माधुरी चौरसिया ने बताया कि लोकपाल की नियुक्ति 20 मई 2024 को हो चुकी है। जिसकी सूचना समय पर यूजीसी को उपलब्ध करा दी गई थी। लेकिन त्रुटिवश डिफॉल्टर लिस्ट में ज्ञानोदय यूनिवर्सिटी, वैष्णव यूनिवर्सिटी इंदौर सहित चार अन्य यूनिवर्सिटियों के नाम प्रकाशित हो गए। जिसका हमने खंडन किया है। अति शीघ्र नई सूची जारी होने का हमें आश्वासन मिला है। इसके बारे में हमें मेल भी प्राप्त हो चुका है।
डॉ माधुरी चौरसिया ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वह किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति में ना रहे ज्ञानोदय यूनिवर्सिटी अपने संपूर्ण कार्य विधिवत रूप से संपादित करती है। विद्यार्थी बेहिचक होकर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल हो। उल्लेखनीय है कि ज्ञानोदय शिक्षण संस्था की शुरुआत सन 1987 में हुई थी। पिछले वर्ष ही मध्य प्रदेश शासन के विश्वविद्यालय आयोग द्वारा ज्ञानोदय को यूनिवर्सिटी की मान्यता प्रदान की गई है।