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June 28, 2024, 7:54 pm
NEWS : ठाकुर जी के दर्शन एवं महाकुंभ के आयोजन से अभिभूत हुए जिला कलेक्टर, स्वामी सुदर्शनाचार्य ने कहा- भक्ति और ज्ञान एक दूसरे के पूरक, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। कल्याण महाकुंभ के दौरान कल्याण नगरी के राजाधिराज ठाकुर श्री कल्लाजी का शुक्रवार को सहस्त्र  कमल दल सहित सतरंगी पुष्पों की मनोहारी झांकी के बीच ठाकुरजी को धराया गया व्यंकटेश तिरूपति बालाजी का स्वरूप देखकर हर कोई भक्त यह अनुभूति कर रहा था मानो वे साक्षात बालाजी के दर्शन कर धन्य हो रहे हो। ठाकुर जी सहित पंच देवों का अनुपम श्रंगार इतना आलौकिक रहा कि हर कोई कल्याण भक्त अपने आराध्य के इस अनुपम स्वरूप को देखकर भक्त और भगवान को एकाकार करने का प्रयास करते नजर आए। स्वर्ण, रजत एवं चढावयुक्त श्रंगार देखकर ऐसा लगा मानो ठाकुरजी की मूर्ति में स्वयं बालाजी विराजित हो गए हो। इस मौके पर ठाकुरजी को 201 प्रकार के नानाविध मिष्ठान, चटपटे व्यंजन और फलों के छप्पनभोग की झांकी तो सभी के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहीं। जिसमें तिरूपति बालाजी को न्यौछावर किए जाने वाले छप्पनभोग की कई सामग्रियां लोगों को बरबस ही आकर्षित कर रही थी।

ठाकुरजी के दर्शन एवं महाकुंभ के आयोजन से अभिभूत हुए जिला कलेक्टर
कल्याण महाकुंभ के षष्ठम दिवस संध्या वेला में वेदपीठ पहुंचकर ठाकुरजी के अनुपम झांकी व अनूठे छप्पनभोग के दर्शन के साथ कल्याण महाकुंभ के विभिन्न आयोजनों को देखकर जिला कलेक्टर आलोक रंजन अभिभूत हो गए। उन्होंने कहा कि ठाकुरजी के दर्शन कर वे स्वयं को धन्य होने की अनुभूति कर रहे हैं, वहीं कल्याण महाकुंभ के नाम से आयोजित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी प्रेरणास्पद हैं। उन्होंने कहा कि ठाकुरजी के नितनये श्रंगार, प्रतिदिन मनोहारी झांकी, कई प्रकार का छप्पनभोग, 51 कुण्डीय विष्णु महायज्ञ और नारदीय महापुराण कथा का संयुक्त आयोजन इस नगर की विशिष्ट पहचान बना रहा हैं। इतने भव्य एवं विशाल आयोजन में वेदपीठ के आचार्यों, बटुकों, न्यासियों, पदाधिकारियों, वीर-वीरांगनाओं के सामूहिक प्रयास की प्रशंसा करते हुए जिला कलेक्टर रंजन ने कहा कि व्यापक स्तर पर जन जुड़ाव के फलस्वरूप ही इतना भव्य आयोजन पूरे आनंद के साथ संपन्न हो रहा हैं। उन्होंने व्यासपीठ की आरती करते हुए कहा कि जीवन प्रथम बार नारदीय महापुराण कथा का आयोजन का दर्शन सौभाग्य की बात हैं। उनके साथ उपखंड अधिकारी विकास पंचोली, तहसीलदार गोपाल जीनगर का व्यासपीठ की ओर से आत्मिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया।

विष्णु महायज्ञ में 350 यजमान जोड़ों ने दी आहूतियां 
कल्याण महाकुंभ के सप्तम दिवस शुक्रवार को सिद्धाश्रम तीर्थ स्थित नारदीय यज्ञशाला में 51 कुण्डीय विष्णु महायज्ञ के चतुर्थ दिवस लगभग 350 यजमानों द्वारा गौघृत्य एवं शाकल्य की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापित देवताओं की पूजा करते हुए द्वादश अक्षर मंत्र ओम नमरू भागवते वासुदेवाय का जाप करते हुए आहूतियां देकर सर्वस्त्र खुशहाली एवं अच्छी वर्षा की कामना की। चतुर्थ दिवस का यज्ञ रायका एवं रेबारी समाज के नाम रहा। जिनकी अधिकाधिक भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि रेबारी समाज श्री कल्लाजी को अपना ईष्ट देव मानता हैं और उसी अनुरूप वे पूरी श्रद्धा के साथ महाकुंभ में भागीदारी निभा रहे हैं। यज्ञशाला में प्रवेश से पूर्व पुरूष यजमानों का सामूहिक हेमान्द्री स्नान का विहंगम दृश्य गंगा तट के किसी भव्य आयोजन का प्रतिक लग रहा था। यज्ञ के महत्ता के अनुरूप यजमानों के साथ साथ कई भक्त नर नारियों ने यज्ञशाला की परिक्रमा कर स्वयं को धन्य किया।                       

शुक्रवार को व्यंकटेश बालाजी दिव्य धाम अलवर के स्वामी सुदर्शनाचार्य ने कहा कि शास्त्ररूपी नेत्र के बिना मानव मात्र को नेत्रहिन माना गया हैं, क्योंकि भक्ति के बिना ज्ञान और ज्ञान के बिना भक्ति अधूरी हैं इसलिए ज्ञान और भक्ति दोनों एक दूसरे के पूरक कहे जाते हैं। स्वामी सुदर्शनाचार्य शुक्रवार को 19 वें कल्याण महाकुंभ के उपलक्ष्य में सिद्धाश्रम तीर्थ के नेमीशारण्य कथा मंडप में आयोजित श्रीमद नारदीय महापुराण की कथा का व्यासपीठ से रसामृतपान करा रहे थे। उन्होंने देवर्षि नारद एवं ऋषि सनंदन के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि भक्ति पथ में ज्ञानी भक्त को भगवान ने अपनी आत्मा कहा हैं। भाव जगत साहित्य एवं व्याकरण से शुद्ध और श्रंगारित होता हैं। संस्कृत के कुछ शब्द अनेकार्थ लिए हुए हैं। उन्होंने ज्ञान पथ में चार वेद, छह शास्त्र और 18 पुराणों की चर्चा के परिपेक्ष में बताया कि सेंधव शब्द का भावार्थ सिंह देश में उत्पन्न होने वाला तथा इस शब्द का उपयोग नमक के लिए भी किया जाता हैं। उन्होंने कहा कि शकल शास्त्रों के अध्ययन के लिए व्याकरण का ज्ञान नितांत आवश्यक हैं, क्योंकि प्राचीन काल में व्याकरण को पाणीनिय माना जाता रहा हैं। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के लोप होने पर व्यास जी प्रकट होकर शास्त्रों की रचना करते हैं तथा भाषा के विकृत होने पर भगवान शिव स्वयं पतंजलि बनकर व्याकरण शास्त्र के प्रकट करते हैं। व्याकरण को शास्त्ररूपी पुरूष का मुख कहां गया हैं इसलिए मुख हमेशा शुद्ध रहना चाहिए तथा वाणी में मधूरता आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि एक बालक कई शास्त्रों का अध्ययन कर अपनी मां के समक्ष सहप्रशंसा करने लगा तो मां ने उसे समझाया कि व्याकरण के बिना शब्द ज्ञान असंभव हैं। भक्ति पथ के संबंध में नारद व ऋषि सनंदन के संवाद में मोक्ष प्राप्ति के संबंध में राजा जनक और सुखदेव मुनि संवाद का उल्लेख करते हुए बताया कि आयु, धन व कुल वृद्ध से श्रेष्ट ज्ञानवृद्ध होता हैं, इसलिए सुखदेव जैसे परमहंस ज्ञानी ने ज्ञान प्राप्त करने के लिए राजा जनक के शिष्य बने। उन्होंने बताया कि विषय आसक्ति मोक्ष में बाधक हैं इसलिए मुक्ति के लिए विषयों का विष के रूप में त्याग करना चाहिए। कथा के प्रारंभ में स्वामी जी ने मंदिर परिसर में ठाकुर श्री के दर्शन कर पूजा अर्चना करते हुए कहा कि महाकुंभ के सप्तम दिवस कल्याण नगरी के राजाधिराज का व्यंकटेश बालाजी स्वरूप में प्रत्यक्ष दर्शन से भक्तों के पापों का नष्ट होना तय हैं, क्योंकि वे प्राणी मात्र के पापों को नष्ट करने वाले देव हैं। ठाकुर जी को व्यंकटेश बालाजी के अनुपम स्वरूप के साथ उसी अनुरूप धराए गए छप्पनभोग की झांकी की महिमा का बखान करना भी कठिन हैं। इतना ही नहीं सहस्त्र कमल दल व अनेक पुष्पों की झांकी से पंचदेवों की शोभा अद्वितीय एवं अनुपम प्रतीत होने के साथ समूचा वेदपीठ भिनी-भिनी महक सुगंधित होकर भक्तों का मन मोह रहा हैं।
सहस्त्र कमल दल सहित झांकी के बीच ठाकुरजी का व्यंकटेश तिरूपति बालाजी स्वरूप आलौकिक रहा।

दिव्य दर्शन की झांकी में दिल्ली, कलकत्ता और बैंगलोर के फूल होंगे आकर्षण का केन्द्र
कल्याण महाकुंभ के अंतिम दिवस आषाढ़ कृष्णा अष्टमी को ठाकुरजी के दरबार को अनोखे अंदाज में सुसज्जित करने के लिए दिल्ली से आए बीस लोगों का दल दिल्ली, कलकत्ता व बैंगलोर से मंगवाएं गए फूलों की झांकी बनाने में अनवरत जूटा रहा। इस दौरान सहस्त्र कमल, गुलाब, डेजी, लीली, टूबरोज, रजनीगंधा, जारगाथ, कंडीसेन सहित कई प्रकार के फूलों और हरी पत्तियों से तैयार की जा रही झांकी अनुपम एवं विशिष्ट आकर्षण का केन्द्र होगी।

ठाकुरजी के दिव्य दर्शन, मातृ-पितृ पूजन, ध्वजारोहण सहित अन्य अनुष्ठान आज
कल्याण महाकुंभ के अंतिम दिवस आषाढ़ कृष्णा अष्टमी शनिवार को प्रातरू साढ़े 7 बजे विष्णु महायज्ञ की पूर्णांहुति के उपरांत प्रातरू 9 बजे सामूहिक मातृ-पितृ पूजन, संत आशीर्वाद, कथा के साथ ही प्रातरू 11 बजे मंदिर पर ध्वजारोहण उपरांत दोपहर ठीक 12.32 बजे घंटा घड़ियाल, शंखनाद एवं गगनभेदी जयकारों के साथ ठाकुरजी के दिव्य दर्शन का सौभाग्य मिलेगा।

प्रेम शंकर के भजन युवाओं को खूब रास आए, रतन राव की मधुर आवाज ने मोहा सब का मन
कल्याण महाकुंभ में गुरुवार रात्रि को आयोजित भजन संध्या में प्रसिद्ध गायकों रतन राव, प्रेमशंकर जाट और रोहित भूषण ने अपने भजनों के माध्यम के ऐसी भजन सरिता बहाई कि लोग भक्ति रस सराबोर होते नजर आए। रतनराव ने गणपति वंदना से भजन संध्या आरंभ करते हुए अपने लोकप्रिय भजन मारी टूटी झोपड़िया साँवलिया सेठ के प्रसिद्ध भजन की प्रस्तुति देकर वातावरण को कृष्णमयी बना दिया। वहीं प्रेमशंकर जाट ने तेजाजी की महिमा का गुणगान करते हुए भक्तों को आनंदित किया, जिसके फलस्वरूप बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी तालियों के साथ संगत करते नजर आए। भजन संध्या के अंतिम छोर पर रोहित भूषण ने महाकाल के भजनों की प्रस्तुति देकर भजन संध्या को द्विगुणित कर दिया।

विशाल एलईडी पर कार्यक्रमों का प्रदर्शन बन रहा हैं आकर्षण का केन्द्र
कल्याण महाकुंभ के दौरान सिद्धाश्रम तीर्थ के नारदीय यज्ञशाला, नेमीशारण्य कथा मंडप एवं कल्लाजी मंदिर के सभी आकर्षक आयोजनों को कथा मंडप में विशाल एलईडी के माध्यम प्रदर्शन कर आदित्य डिजिटल स्टूडियों अपने सदप्रयासों की अनूठी छाप छोड़ रहा हैं। जिनके छायाकारों के माध्यम से सभी आयोजनों को एलईडी के साथ-साथ लाईव प्रदर्शन के लिए भी अनुकरणीय प्रयास किया गया।

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