उज्जैन। आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्र का आरंभ शनिवार को पुनर्वसु नक्षत्र व्याघात योग व किंस्तुघ्न करण की उपस्थिति में हुआ है। इस बार गुप्त नवरात्र 10 दिनों के रहेंगे। ऐसी स्थिति इसलिए बनी है कि आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष 13 दिन का था। वहीं गुप्त नवरात्र में शुक्ल पक्ष में तिथि की वृद्धि होने से यह स्थिति बनी है।
पं. अमर डिब्बेवाला के अनुसार शाक्त साधकों का उपासना या साधना का क्रम 10 दिन विशेष है। नवरात्रि की तिथि में वृद्धि होने का यह शुभ संकेत माना जाता है। देवी भागवत के अनुसार चार नवरात्र वर्ष में आते है, इनमें दो गुप्त नवरात्र और दो प्रकट नवरात्र होते है। गुप्त नवरात्र माघ मास और आषाढ़ मास की नवरात्रि मानी जाती है। जबकि प्रकट नवरात्रि चौत्र और अश्विन मास की मानी जाती है। देवी मंदिरों में साधक गुप्त नवरात्र में वैदिक उपासना करेंगे।
दो ग्रहों का राशि परिवर्तन और नक्षत्र परिवर्तन होगा
गुप्त नवरात्रि में दो ग्रहों का राशि परिवर्तन व दो ग्रह नक्षत्र परिवर्तन करेंगे। 7 जुलाई की सुबह 4रू31 पर शुक्र ग्रह का कर्क राशि में प्रवेश होगा। वहीं राहु का उत्तरा भाद्रपद के चौथे चरण में और केतु का हस्त नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश होगा। 12 जुलाई को मंगल मेष राशि को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। 13 जुलाई को गुरु का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश होगा। इन ग्रहों के राशि तथा नक्षत्र में परिवर्तन करने से मौसम की स्थिति में बदलाव आएगा।
मांगलिक कार्य के लिए पांच मुहूर्त खास
चार्तुमास के पहले 15 जुलाई तक शुभ मांगलिक कार्य के मुहूर्त रहेंगे। जिसमें गृह वास्तु विवाह आदि कार्य हो सकेंगे। उसके बाद 17 जुलाई को देवशयनी एकादशी होगी। 15 दिन के पक्ष काल में चार-पांच मुहूर्त ही ऐसे खास है। इनमें 8,9,11,12 व 15 जुलाई के मुर्हूत में गृह प्रवेश, विवाह, नवीन वस्तुओं की खरीदी या नए ऑफिस का शुभारंभ किया जा सकेगा।