इंदौर। इंडियन ऑर्थाेपेडिक एसोसिएशन के एमपी चौप्टर और एसोसिएशन ऑफ ऑर्थाेपेडिक सर्जन इंदौर की ओर से आयोजित दो दिनी मध्य प्रदेश आर्थ्राेप्लास्टी कांफ्रेंस ष्मैक -2024ष् की शुरुआत शनिवार को होटल द पार्क में हुई। ष्नी-360 डिग्रीष् थीम पर आयोजित हो रही इस कॉफ्रेंस में पहले दिन एजुकेशनल सेशन के साथ लाइव सर्जरी की गई।
दिल्ली से आए सीनियर फैकल्टी डॉ. सी.एस यादव ने टोटल नी रिप्लेसमेंट पर वर्कशॉप ली। उन्होंने बताया कि भारत में घुटने की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही है। वेस्टर्न कंट्रीज में हिप रिप्लेसमेंट की सर्जरी ज्यादा होती है वहीं हमारे यहां नी रिप्लेसमेंट ज्यादा होते हैं। हर साल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी में 30ः की वृद्धि हो रही है, इसका का सबसे बड़ा कारण लाइफस्टाइल के फर्क का है।
कोर्स डायरेक्टर डॉ. विनय तंतुवाय ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में पहले दिन देश के जाने माने सर्जनों द्वारा 4 रोबोटिक सर्जरी लाइव हॉस्पिटल आर्थरोस से की गई। इन कॉम्पलेक्स सर्जरी की खास बात यह रही कि चारों सर्जरी अलग अलग प्रकार के रोबोट्स की मदद द्वारा की गई। पहली लाइव सर्जरी में ऑगमेंटेड रियलिटी की मदद से पेशेंट के एलाइनमेंट को नेविगेशन की मदद से ठीक किया गया। वहीं दूसरी सर्जरी पूरी तरह से ऑटोमेटिक रोबोटिक सिस्टम से की गई, इस सर्जरी में बोन के कट्स, एलाइनमेंट, बैलेंसिंग आदि का काम रोबोटिक सिस्टम ने खुद से किया। तीसरी सर्जरी में फोर्थ जनरेशन रोबोटिक सिस्टम से की गई। इसमें सिटी स्कैन की आवश्यकता नहीं होती है और शॉ से ही बोन के कट लिए जाते हैं। वहीं चौथी सर्जरी में कन्वेंशनल तरीके से ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी कर यह बताया गया कि नी रिप्लेसमेंट सर्जरी करते समय किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
इंडियन ऑर्थाेपेडिक एसोसिएशन एमपी चेप्टर के प्रेसिडेंट डॉ. साकेत जती ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के लगभग 200 ऑर्थाेपेडिक सर्जन ने हिस्सा लिया जिसमें लगभग 100 सर्जन इंदौर के शामिल थे। इस कोर्स के माध्यम से देश के विभिन्न शहरों से आई जानी मानी फैकल्टी ने नी रिप्लेसमेंट से जुड़े लेटेस्ट ट्रेंड, टेक्निक और सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस कांफ्रेंस का मकसद सेंट्रल इंडिया के ऑर्थाेपेडिक सर्जन को जॉइंट रिप्लेसमेंट की नई तकनीकों से अवगत करवाना है।
भारतीय फिटनेस का कम रखते हैं ध्यान
डॉ. यादव ने कहा हम विदेशों की तुलना में फिटनेस का कम ध्यान रखते है। वेट ज्यादा होने के कारण बढ़ती उम्र के साथ ऑस्टियो अर्थराइटिस होने का खतरा काफी ज्यादा रहता है। लोगों के घुटने घिस जाते हैं और उन्हें अपने डेली रूटीन को ही पूरी करने में परेशानी होने लगती है। नी रिप्लेसमेंट की बढ़ी संख्या का कारण लोगों में अवेयरनेस और लाइफ एक्सपेक्टेशन का बढ़ना भी शामिल है। इस वजह से लोग घुटने में परेशानी शुरू होने के साथ ही अब रिप्लेसमेंट कराकर क्वालिटी ऑफ लाइफ को एंजॉय करते है। इसके साथ ही लोगों की अफोर्ड करने की क्षमता बढ़ी है, रिप्लेसमेंट की सुविधा बड़े शहरों के साथ साथ छोटे शहरों में भी उपलब्ध होने के कारण रिप्लेसमेंट सर्जरी की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।
हर व्यक्ति करें एक घंटे एक्सरसाइज
एम्स दिल्ली के प्रो. डॉ . विजय कुमार ने कहा कि भारत में महिलाओं की हड्डियां बहुत कमजोर होती हैं ऐसा कैल्शियम की कमी की वजह से होता है। ऐसे में जरूरी है कि कैल्शियम युक्त पौष्टिक आहार लेते रहे। अगर आप यंगर एज में सही डाइट लेते है तो वह ताउम्र काम आती है। इसके अलावा हर व्यक्ति को दिन में एक घंटा एक्सरसाइज जरूरी करनी चाहिए। उन्होंने वर्कशॉप में नी रिप्लेसमेंट में कौन से इम्प्लांट का इस्तेमाल करना चाहिए इसके बारे में जानकारी दी।
रोबोटिक सर्जरी से होती है फास्ट रिकवरी
कांफ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन और एओएसआई के प्रेसिडेंट डॉ. अरविंद रावल का कहना है कि रोबोटिक टेक्नोलॉजी ने नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को काफी इम्प्रूव किया है। ऐसे में अब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है। रोबोटिक सर्जरी से पेशेंट को काफी आराम है। इसमें पेशेंट को काफी बेहतर मूवमेंट मिलता है, दर्द और ब्लीडिंग कम होती है और रिकवरी भी फास्ट होती है।