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July 11, 2024, 11:42 am
BIG NEWS : देश-विदेश के कौने-कौने में मशहूर है मप्र के नीमच के मोहर्रम की अजादारी और ताज़िएदारी, हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ीमुश्शान शहादत की याद में सजने लगे हैं अज़ाखाने, पढ़े अब्दुल अली ईरानी की खबर

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नीमच। मध्यप्रदेश के नीमच के मोहर्रम की अजादारी और ताज़िएदारी देश-विदेश के कौने-कौने में मशहूर है। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ीमुश्शान शहादत की याद में मोहर्रम के अवसर पर नीमच में अज़ाखाने सजने लगे हैं। शोहदा ए कर्बला की अजादारी के लिए खास तौर पर देश-विदेश से नौजवान 10 दिनों के लिए कारोबार बंद रखकर अपने वतन नीमच पहुंचे है। आशूरा के दिन यानी मोहर्रम की दसवीं तारीख को नीमच में ताजियों का विशाल जुलूस निकलता है। जिसके लिए इमामबारगाहों में तैयारी जोर शोर से जारी है। नीमच में ताज़ियेदारी का इतिहास 200 साल पुराना है। नीमच के ताजिया और मोहर्रम को सांप्रदायिक सद्भाव की अनूठी मिसाल कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। हर वर्ग के लोग परंपरागत रूप से ताज़िए में शामिल होते है।

इतिहास की रोशनी में देखे तो, हिजरी सन 61 में यज़ीद नामक तानाशाह की लाखों की फौज से मुक़ाबिल होकर जुल्म, आतंकवाद, धोखेबाजी और झूठ के खिलाफ ललकार लगाते हुए हजरत इमाम हुसैन के 72 साथियों ने इराक के कर्बला में तीन दिन भूखे प्यासे रहकर जंग लड़ी। अन्याय के खिलाफ तपते रेगिस्तान में आशूरा के दिन इमाम हुसैन के साथ 6 माह के मासूम से लेकर, कड़ियल नौजवान और बुजुर्ग तक ने अपने जान की कुर्बानी दे दी। इन्हीं की याद में ग़मों का त्योहार मोहर्रम मनाया जाता है।

विद्वान पुरुषों ने इतिहास के इस वाकिए को मानव समाज के लिए प्रेरणादाई कहा है। महापुरुषों ने कहा है कि मुर्दा कौमों को जगाना है तो इमाम हुसैन (अस) के कर्बला के आंदोलन से सबक लेना चाहिए। हुसैन केवल एक नाम नहीं जुल्म के खिलाफ एक क्रांति है, इंकलाब है, एक नारा है। बिल्कुल ठीक कहा गया है कि कर्बला वालों की शहादत ने इंसानियत को ज़िंदा कर दिया।

बताते चलें कि मोहर्रम में इसी सिलसिले में शहर में हुसैन के चाहने वाले जगह-जगह अलम लगा रहे हैं। वाअज़ और मजलिसों का दौर जारी है। मरसिया, नोहाख्वानी और मातमों से अज़ाखाने आबाद हो रहे हैं। ज़ाकिरे हुसैन शहीदों की मासूमियत, मजलूमियत और बहादुरी का जिक्र कर रहे हैं। तबरूक और नियाज़ तक्सीम हो रही है। सातवीं मोहर्रम को अलम और 10वीं मोहरम को अखाड़े के साथ ताजियों का विशाल जुलूस निकलेगा। दूरदराज़ से हजारों की संख्या में सभी समुदाय के श्रद्धालु अपनी आस्था और मनोकामनाओं के साथ शिरकत करेंगे। मोहर्रम के अवसर पर नीमच के गंगा जमुनी तहजीब की एक बेहतरीन झलक एकता का संदेश देती हुई शहर की फिजाओं में दिखाई देगी।

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