चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानु नवकार भवन में शांत क्रान्ति संघ की महासती शीलप्रभा म सा ने पर्यूषण पर्व के छठे दिवस पर धर्मसभा में कहा कि हमारे जीवन में चरित्र की सुवास होनी चाहिए। चार प्रकार के फूलों का उदाहरण देते हुए बताया कि हमारा चारित्र महकता हुआ होना चाहिए। वल्लभ भाई पटेल के भाई की शील चारित्र का उल्लेख करते हुए महासती ने महिलाओं से पूछा कि क्या आप बिना टीवी मोबाईल देखे बिना अपना गर्भकाल व्यतीत कर सकती हो? छोटे-छोटे बच्चों को दूध पीलाने, खाना खिलाने के लिए टीवी मोबाईल दिखाना भयंकर दुष्परिणाम देने वाला है। आज की नारी ताज पहनने के लिए वासना के कुएं में कूद रही है। फौजी के वस्त्र शौर्य, श्रावक के वस्त्र भक्ति और युवतियों के आधुनिक भड़कीले वस्त्रों से वासना परिलक्षित होती है। हमारे समाज की लड़कियां आधुनिकता और वासना के जाल में फंसकर परिवारों से दूर जाकर अपना भविष्य खराब कर रही है। हमें अपने और अपने बच्चों के चारित्र पर ध्यान देना होगा। हम निर्बलता को समाप्त कर सबलता को प्राप्त करें। छः काय जीवों की रक्षा करें। 1141 जीव मारने वाला अर्जुन माली भी सुदर्शन सेठ की संगत में आकर तिर गया।
इससे पूर्व महासती नित्यप्रभा म सा ने दो शब्दों बचाव और प्रतिबंध पर अपना प्रवचन दिया। मोबाईल कवर, हेलमेट, तिजोरी और बीमारी में परहेज के उदाहरणों से इन शब्दों का परिस्थितिनुसार व्यापक अर्थ समझाया। परिवार के बड़ों का अनुशासन बच्चों के बचाव का भाव लिए हुए होता है।
धर्मसभा के प्रारंभ में साध्वी सत्यप्रभा ने अंतकृत सूत्र में अतिमुक्तकुमार के माता से संयम को जान लेने और भगवान की वाणी सुनकर संयम लेने का प्रसंग सुनाया। महासती पुण्यप्रभा म सा ने आलोचना पाठ में 18 पापों का लय में सुन्दर वाचन कर रहे हैं। महासती राजश्री म सा ने विभिन्न प्रत्याख्यान करा मंगल पाठ सुनाया। सभा का संचालन संघ मंत्री इन्द्रेश कोठारी ने किया।