शाजापुर। सरस्वती विद्या मंदिर, शरदनगर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा लोकमाता देवी अहिल्याबाई की त्रिशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य व्याख्यान एवं काव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के भैया-बहनों द्वारा भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुई।
इस गरिमामय आयोजन में मुख्य अतिथि श्री त्रिपुरारी लाल शर्मा (प्रांताध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, मालवा प्रांत) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने शिव की आराधना करते हुए मालवा साम्राज्य का शासन धर्म और न्याय के आधार पर चलाया। उन्होंने प्रजा के हित और करुणा को प्राथमिकता दी, जिससे उन्हें पुण्यश्लोका माता कहा गया। अहिल्याबाई ने मराठी भाषी होते हुए भी हिंदी, संस्कृत, और मालवी भाषाओं को बढ़ावा दिया। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महिल सेना बनाई और विधवाओं को रोजगार देकर साड़ी उत्पादन का कार्य शुरू कराया।
अहिल्याबाई ने 100 से अधिक मंदिरों का जीर्णाेद्धार किया, जिनमें काशी विश्वनाथ और सोमनाथ शामिल हैं। उन्होंने किसानों के लिए 9/12 योजना लागू की, भूमिहीनों को भूमि दी, और वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया। अहिल्याबाई ने शिक्षा, विधवा विवाह, दहेज उन्मूलन, और सती प्रथा रोकने के लिए सुधार किए। उन्होंने न्यायप्रियता का परिचय देते हुए अपने परिवार में भी न्याय किया और कैदियों को क्षमा कर पुनर्वास की व्यवस्था की।
उनका जीवन लोककल्याण और धर्म पर आधारित था। उन्होंने शिव की प्रतिनिधि के रूप में शासन चलाया और सादा जीवन उच्च विचार के आदर्शों पर अमल किया। अहिल्याबाई का जीवन आज भी सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री राजीव जी जलखरे (प्राचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर, शरदनगर) ने की। उन्होंने देवी अहिल्याबाई के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता पर बल दिया और उनके कार्यों को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया।
विशेष अतिथि श्री जगदीश जी भावसार, डॉ. विद्याशंकर विभूति (प्राचार्य, बीकेएसएन कॉलेज), और श्री बालचंद्र सूर्यवंशी ने अपने वक्तव्यों में देवी अहिल्याबाई की सामाजिक एवं धार्मिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन त्याग, परोपकार और न्याय की मिसाल है।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण और देवी अहिल्याबाई पर रचित मंदिर, तीर्थ, शिव की गाथा,
उसके श्रम से बस पाई थी।
अमर कहानी उस देवी की,
जो पुण्यश्लोक कहलाई थी।।
एक प्रेरणादायक कविता साहित्य परिषद शाजापुर के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र देवतवाल श्ज्वलंतश् ने प्रस्तुत की।
इस आयोजन में वक्ता के रूप में श्री योगेश उपाध्याय, श्री कैलाश गोंड, श्री विशाल महेश्वरी, और श्री हरिओम पाटीदार लाहौरी ने देवी अहिल्याबाई के जीवन, उनके आदर्शों और उनकी शासन व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती संतोष शर्मा और श्री संतोष मतवाला ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र देवतवाल श्ज्वलंतश् ने किया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, और सहभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में संजय बोराडे, मुकेश सक्सेना, रमेश गवली,महेंश यादव, श्रीमती बनारसी पंड्या, सुनीता सोनी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे।
लोकमाता देवी अहिल्याबाई पर आधारित प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन।
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन और कार्यों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर, शरदनगर में किया गया। प्रदर्शनी का शुभारंभ अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांत अध्यक्ष, माननीय श्री त्रिपुरारीलाल शर्मा ने किया।
ष्सूरज का हरकाराष् का भव्य विमोचन संपन्न।
वरिष्ठ कवि डॉ. दुर्गाप्रसाद झाला की नवीनतम काव्य कृति ष्सूरज का हरकाराष् का भव्य विमोचन समारोह आयोजित हुआ। साहित्य प्रेमियों और विद्वानों ने इस कृति को गहन चिंतन और उत्कृष्ट अभिव्यक्ति का अद्भुत उदाहरण बताया।
मुख्य अतिथि श्री त्रिपुरारी लाल जी शर्मा ने इसे साहित्य जगत में नई ऊर्जा का संचार करने वाली रचना कहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
शाजापुर इकाई की नई कार्यकारिणी की घोषणा भी हुई।
शाजापुर इकाई द्वारा आयोजित एक व्याख्यान एवं रचना पाठ के अंत में जिला साहित्यकार सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें इकाई की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई। इस अवसर पर साहित्यिक और सामाजिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।
घोषित कार्यकारिणी इस प्रकार हैरू
अध्यक्षरू जितेन्द्र देवतवाल श्ज्वलंतश्
उपाध्यक्षरू बालचंद्र सूर्यवंशी
महामंत्रीरू योगेश उपाध्याय
संयुक्त सचिवरू श्रीमती कविता पुण्ताम्बेकर
कोषाध्यक्षरू ज्योति प्रकाश माथुर
कार्यकारिणी सदस्यरू संतोष मतवाला, नागेन्द्र गुर्जर, राजकुमार अकेला, सज्जाद अहमद कुरैशी, मशहूर शाजापुरी, अमन जादोन, ललित कुम्भकार, सत्यनारायण पाटीदार, आशुतोष टेलर, विशाल महेश्वरी, अर्पित शर्मा, जांय शर्मा, हनीफ राही, संजय बोराडे।
संरक्षकरू कैलाश गोंड
मार्गदर्शकरू डॉ. एल. एन. व्यास, डॉ. विद्याशंकर विभूति, डॉ. बालेन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. जगदीश भावसार, श्रीमती संतोष शर्मा, मानकचंद बोथरा, सुभाष द्विवेदी।
मीडिया प्रभारीरू देवकरण शर्मा
सांस्कृतिक सचिवरू हरिओम पाटीदार (लाहौरी)
ग्रामीण साहित्य प्रसारकरू अशोक पाटीदार (रंथभवर)