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January 23, 2025, 2:33 pm
BIG NEWS :  दो दिनी जेंडर स्टेटिटिक्स कैपिसटी वर्कशाप, डिप्टी सीएम देवड़ा बोले- पर्यावरण सामाजिक समानता के संतुलन के बिना कोई काम पूरा नहीं हो सकता, पढे़ खबर 

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भोपाल। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने कहा है कि पर्यावरण सामाजिक समानता के संतुलन के बिना कोई भी विकास पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश संयुक्त राष्ट्र सतत विकास के लक्ष्यों पर अमल करने के लिए प्रतिबद्ध है। सतत विकास के लिए भोपाल में हो रही यह कार्यशाला न केवल राज्यों बल्कि जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए प्रेरित करेगी।


कार्यशाला के माध्यम से पर्यावरण सुधार, जिला स्तरीय निगरानी तंत्र को सशक्त बनाने का भी काम किया जा सकेगा। आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने, लैंगिक सांख्यिकी पर कैपिसटी बिल्डिंग में सहयोगी होगी।


राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में दो दिनी कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर डिप्टी सीएम देवड़ा ने कहा कि हमारी सरकार इसके लिए हर संभव सहयोग करने प्रतिबद्ध है। इस कार्यशाला में शोध और अन्य कार्यों के जो सकारात्मक रिजल्ट आएंगे, उस पर सरकार अमल करने का काम करेगी। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन और मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग के संयुक्त तत्वावधान में केपेसिटी बिल्डिंग वर्कशाप ऑन मानिटरिंग फ्रेमवर्क ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स कंपाइलेशन ऑफ इनवायरमेंट एकाउंट्स एण्ड जेण्डर स्टैटिस्टिक्स का आयोजन किया जा रहा है।


उद्घाटन सत्र में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के अलावा मुख्य सचिव अनुराग जैन, प्रमुख सचिव योजना संजय कुमार शुक्ल, संयुक्त राष्ट्र के भारत में रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर शोंबी शार्प, महानिदेशक (सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स) एनके संतोषी, सचिव डॉ. सौरभ गर्ग और सहायक महानिदेशक एससी मलिक शामिल हुए।


नीति निर्माण और एग्जीक्यूशन में आएगा सुधार
यह कार्यशाला सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी), पर्यावरणीय आंकड़ों, और जेंडर स्टैटिस्टिक्स के मजबूतीकरण में मददगार साबित होगी। कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की निगरानी, पर्यावरणीय आंकड़ों और जेंडर स्टैटिस्टिक्स के सटीक और प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना है। यह न केवल डेटा मॉनिटरिंग और विश्लेषण को मजबूत करेगा बल्कि नीति निर्माण और क्रियान्वयन में भी सुधार करेगा।


एक्सपीरियंस शेयर करेंगे स्पेशलिस्ट, अधिकारी
कार्यशाला में अधिकारी और विशेषज्ञ अपने अनुभव और रणनीतियों को साझा करेंगे। इसमें सतत विकास लक्ष्यों, पर्यावरण और जेंडर स्टेटिस्टिक्स से संबंधित डेटा के उपयोग से नीतियों को और सशक्त बनाया जाएगा। साथ ही राज्यों और जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को आधुनिक मॉनिटरिंग टूल्स और फ्रेमवर्क्स के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सफल प्रयासों और बेस्ट प्रैक्टिसेस को साझा किया जाएगा, जो दूसरों के लिए प्रेरणा बनेंगी। सतत विकास लक्ष्यों की मॉनिटरिंग के लिए एक साझा फ्रेमवर्क का विकास होगा। पर्यावरणीय आंकड़ों और जेंडर विश्लेषण को सशक्त बनाने के लिए रणनीतियों का निर्माण किया जायेगा। राज्यों और केंद्र सरकार के बीच डेटा आधारित समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। नीति निर्माण और क्रियान्वयन में सुधार के लिए बेस्ट प्रैक्टिसेस को अपनाया जायेगा।

यह कार्यशाला एसडीजीऔर पर्यावरणीय आंकड़ों पर केंद्रित है जो समाज में सभी लेवल तक विकास के लाभ पहुंचाने के लिए एक मजबूत आधार भी प्रदान करेगी। कार्यशाला में देशभर से 200 से अधिक अधिकारी और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।


विकास प्रक्रिया से संबंधित आंकड़ों का संकलन जरूरी
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कार्यक्रम में कहा कि विकास प्रक्रियाओं से संबंधित आंकड़ों का समय पर संकलन सबसे जरूरी है। इसके अलावा उनके बदलाव पर सतत निगरानी रखना और उनका समय-समय पर विश्लेषण करना आवश्यक है। इससे नीति निर्माण प्रक्रिया न सिर्फ आसान बल्कि प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास की मूल भावना नीति निर्माण प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है। उन्होंने केन्द्र और राज्य की सर्वाेच्च प्राथमिकता वाली योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि योजनाओं का सम्पूर्ण क्रियान्वयन होना चाहिए तभी अपेक्षित परिणाम मिलते हैं।


मुख्य सचिव ने विकास की दृष्टि से पिछड़ रहे जिलों और विकास खंडों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आंकड़ों का एकीकरण उतना ही जरूरी है जितना समय पर संकलन जरूरी है। उन्होंने विकास के प्रयासों की प्रगति का आकलन करने के लिए भी संकेतकों का विकास करने की आवश्यकता बताई। इसके अलावा मध्यप्रदेश जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्यों के डेटा विश्लेषण और सामाजिक ढांचे के अनुसार बालिकाओं के सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक अधिकारों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।


ऐसे उपकरण विकसित करने की जरूरत जो संकेतकों को वास्तविक समय में माप सकें- शुक्ला
प्रमुख सचिव योजना संजय शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश वन और जैव विविधता में सबसे समृद्ध राज्य है। बहुत से आरक्षित क्षेत्र हैं। मध्यप्रदेश वन अधिकारों के लिए काम कर रहा है। महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत निर्णय ले रहा है और लिंग आधारित बजट बना रहा है। किसी व्यक्ति के लिए उपचार महत्वपूर्ण है, वैसे ही राज्य की प्रगति पर विभिन्न संकेतकों के माध्यम से निगरानी आवश्यक है। अन्य राज्यों से सीखना भी महत्वपूर्ण है। हमें ऐसे उपकरणों को विकसित करने की आवश्यकता है जो संकेतकों को वास्तविक समय में माप सकें।


जिला स्तर पर अनुमान राज्यों के साथ साझेदारी में तैयार किए जा सकते हैं- सौरभ
केन्द्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने बताया कि देश के आर्थिक स्वास्थ्य को दिखाने के लिए आवश्यक सूचकांक प्रदान करता है, जो सामाजिक-आर्थिक नीतियों और बजट के विकास में मदद करता है। आंकड़ों पर आधारित निर्णय लेने, सटीकता में सुधार और सांख्यिकीय अनुमान में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। जिला स्तर पर आंकड़ों की तैयारी भी की जा रही है। जिला स्तर पर अनुमान राज्यों के साथ साझेदारी में तैयार किए जा सकते हैं।


यह ग्रैन्युलर डेटा आधारित निर्णय लेने में सहायक होगा। एन के संतोषी, डीजी (केंद्रीय सांख्यिकी) ने अतिथियों और विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। एससी मलिक एडीजी ने प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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