कुकड़ेश्वर। छोटे से गाँव भगोरी का शासकीय माध्यमिक विद्यालय कभी संसाधनों की कमी और उपेक्षा का शिकार था। लेकिन जब वर्ष 2001 में शिक्षक श्री कैलाश चंद्र तायड़ की वहाँ नियुक्ति हुई, तो उन्होंने विद्यालय की दशा और दिशा बदलने का बीड़ा उठाया। उनके अथक प्रयासों से यह स्कूल अब न केवल शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम छू रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी अग्रणी बन चुका है।
शिक्षा में क्रांति का सूत्रपात
भगोरी स्कूल में प्रारंभिक दौर में पढ़ाई की स्थिति औसत थी। लेकिन श्री तायड़ ने इसे बदलने की ठानी। उन्होंने विद्यालय में नियमित पढ़ाई के साथ-साथ रविवार को भी अतिरिक्त कक्षाएँ शुरू कीं ताकि विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष तैयारी करवाई जा सके। उनके समर्पण और शिक्षण पद्धति का असर यह हुआ कि गाँव के छात्र-छात्राएँ राज्य एवं संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल करने लगे।
सत्र 2019 से 2024 के बीच विद्यालय से कुल 27 छात्र-छात्राओं का चयन प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ। इनमें से 15 विद्यार्थियों का चयन मॉडल एवं उत्कृष्ट विद्यालयों में, 03 विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय मीन्स मेरिट परीक्षा में, 03 छात्राओं का चयन हिंदी ओलंपियाड के संभागीय स्तर (उज्जैन) पर, और 05 छात्र-छात्राएँ इंस्पायर अवार्ड के जिला स्तर पर चयनित हुए। इन उपलब्धियों में जीवन धनगर का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिनका चयन राज्य स्तर पर हुआ।
विद्यालय में हरियाली की नई पहचान
शिक्षा के साथ-साथ श्री तायड़ ने पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी प्राथमिकता बनाया। जब वे इस विद्यालय में आए, तब विद्यालय परिसर में सिर्फ एक नीम का पेड़ था। उन्होंने इसके प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई और अपने प्रयासों से कई पेड़-पौधे रोपे। पानी की कमी को देखते हुए उन्होंने स्वयं टैंकर की व्यवस्था कर पौधों को बचाने का जिम्मा उठाया। आज उनका लगाया हरा-भरा बागान विद्यालय की सुंदरता को बढ़ा रहा है और विद्यार्थियों को प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा दे रहा है।
संस्थान के विकास में सामूहिक सहयोग
श्री तायड़ के इस मिशन में विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती प्रीति सोनी ने भी सक्रिय योगदान दिया। उनके संयुक्त प्रयासों से विद्यालय का वातावरण सकारात्मक और प्रेरणादायक बना। स्थानीय समुदाय और अभिभावकों ने भी इस बदलाव को सराहा और समर्थन दिया, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएँ मिल सकीं।
सराहना और सम्मानकृसमर्पण का पुरस्कार
शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके योगदान को प्रशासन ने भी मान्यता दी। 26 जनवरी को नीमच में आयोजित समारोह में उन्हें कलेक्टर, प्रभारी मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया, विधायक श्री माधव मारू और दिलीप सिंह परिहार के हाथों सम्मानित किया गया।
श्री तायड़ के प्रयासों से न केवल भगोरी का यह विद्यालय एक आदर्श शिक्षण संस्थान बना, बल्कि यह भी साबित हुआ कि एक समर्पित शिक्षक अपने जुनून और मेहनत से किसी भी स्कूल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है।
समाज को दिशा देने वाले शिक्षक
शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज को एक नई दिशा भी देते हैं। श्री कैलाश चंद्र तायड़ जैसे समर्पित शिक्षक ही शिक्षा की असली पूँजी हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य देने का कार्य कर रहे हैं। उनका यह योगदान न केवल भगोरी गाँव, बल्कि सम्पूर्ण शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्तमान में अतिशेष होने से श्री कैलाश तायड का ट्रांसफर गणेश पूरा शासकीय माध्यमिक विधालय में हुआ जहां वो अपनी सेवाएं दे रहे है। जहाँ चाह, वहाँ राहष्कृ कैलाश चंद्र तायड़ ने इस कहावत को अपने कार्यों से सच कर दिखाया है।