इंदौर। नागर ब्राह्मण समाज के आराध्य देव भगवान हाटकेश्वर की जयंती पर विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंिदर परिसर में पुस्तिका समग्र मंथन का विमोचन मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने किया। इस अवसर पर संबोधन करते हुए डॉ. दवे ने कहा कि ईश्वर को उपहार देने की क्षमता साहित्यकार में ही होती है।
वे सीमा-मनीष शर्मा की पुस्तिका समग्र मंथन का विमोचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ईश्वर के कंधे पर दो झालियां होती है, जिसमें एक में सुख और दूसरी में दुःख होते हैं। वे मानव को उपहार स्वरूप सुख और दुःख देते हैं। जिन्हें स्वीकार करना मानव का भी कर्तव्य होता है। दुःख वे ही लोग सहते हैं, जिनमें क्षमता होती है और इस श्रेणी में कलाकार और साहित्यकार आते हैं। एक साहित्यकार ही ईश्वर को उनके द्वारा दी गई भेंट को उपहार स्वरूप वापस करने का जज्बा सािहत्यकार को ही होता है। समग्र मंथन में देश, समाज, संस्कृति और आध्यात्म के अलावा पारिवािरक पृष्ठभूिम का भी समावेश किया गया है। यह प्रयास सराहनीय है। इस अवसर पर खजराना गणेश मंिदर के पुजारी अशोक भट्ट, नागर ब्राह्मण विद्योजक ट्रस्ट अध्यक्ष असीम त्रिवेदी, शिवांजलि ट्रस्ट अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा, प्रवीण त्रिवेदी, हिमांशु पौराणिक, जयेश झा, हर्ष मेहता, श्रेया शर्मा, मिष्ठी शर्मा आदि मौजूद रहे।