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April 13, 2025, 11:23 am
BIG NEWS : महाकाल को शीतलता के लिए बांधे मिट्टी के कलश, 11 कलशों से बाबा पर बहेगी सतत जलधारा, गर्मी से मिलेगी राहत, पढे़ खबर 

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उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज से एक खास परंपरा शुरू हो गई है। 13 अप्रैल से 11 जून तक बाबा महाकाल पर 11 मिट्टी के कलशों से सतत जलधारा बहेगी।


इन कलशों पर देश की प्रमुख नदियों के नाम अंकित किए गए हैं। इनमें गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, शरयु, शिप्रा और गण्डकी शामिल हैं। मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार यह आयोजन हर साल वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तक चलता है।


मंदिर के महेश पुजारी के अनुसार, भगवान के मस्तक पर रखी 11 मटकियों से रक्षा सूत्र के माध्यम से एक-एक बूंद गिरती है। यह जलधारा बाबा महाकाल को गर्मी और हलाहल की उष्णता से राहत देती है। इससे भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति भी होती है। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार- चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि से वैशाख स्नान का आरंभ हो जाता है। धर्मशास्त्र में वैशाख मास का विशेष महत्व है। इस माह के अंतर्गत भगवान विष्णु व भगवान शिव की संयुक्त पूजन करने की परंपरा है। भगवान विष्णु, भगवान शिव का चंदन और सुगंधित द्रव्य व पुष्पों के माध्यम से उपासना का अनुक्रम करना चाहिए। जिन जातकों की जन्म कुंडली में बृहस्पति एवं राहु की स्थिति कमजोर है। ऐसे जातक वैशाख मास पर्यंत भगवान विष्णु और शिव का वैदिक अनुष्ठान करें। कुछ ना हो सके तो जल अवश्य चढ़ाएं, चंदन अर्पित करें सुगंधित पुष्प चढ़ाएं।

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