सीहोर। देवास जिले स्थित खिवनी वन्यजीव अभयारण्य में एक दिवसीय गिद्ध गणना के दौरान दुर्लभ सफेद गिद्धों का एक जोड़ा मिला है। वन विभाग को यह सफलता अभयारण्य में चिह्नित चार स्थानों में से एक पर मिली।
वन विभाग के अनुसार, यह इजिप्शियन वल्चर प्रजाति के सफेद गिद्ध हैं और इनके घोंसले में अंडे होने की संभावना है। 1990 के बाद से गिद्धों की संख्या में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। इस जोड़े की मौजूदगी से प्रजाति के संरक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी है।
वाइल्डलाइफ सेंचुरी के रेंजर भीम सिंह सिसोदिया ने बताया
वर्ष में दो बार होने वाली गणना में सर्दियों में प्रवासी और गर्मियों में स्थानीय गिद्धों की गिनती की जाती है। बाघों की निगरानी के लिए लगाए गए कैमरों में एक राज गिद्ध भी कैद हुआ है, जिससे अभयारण्य में इस प्रजाति की उपस्थिति की पुष्टि हुई है।भारत में एक समय बड़ी संख्या में पाए जाने वाले सफेद गिद्ध अब विलुप्ति के कगार पर हैं। इस दुर्लभ प्रजाति की संख्या में पिछले कुछ दशकों में भारी गिरावट आई है। सफेद गिद्ध की पहचान इनके सफेद पंखों, काले सिर और गर्दन से होती है। इनके पंखों का फैलाव 2.5 से 3 मीटर तक होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इनकी घटती संख्या का मुख्य कारण पशुओं में दर्द निवारक के रूप में प्रयोग की जाने वाली डाइक्लोफेनाक दवा है। इसके अलावा आवास का नष्ट होना, भोजन की कमी और अंधविश्वास भी प्रमुख कारण हैं।
वर्तमान में सफेद गिद्ध हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में ही देखे जा सकते हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार ने 2006 में डाइक्लोफेनाक पर प्रतिबंध लगाया और प्रजनन केंद्र स्थापित किए हैं।खिवनी वन्यजीव अभयारण्य प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह अभयारण्य विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है और लगभग 118.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।
अभयारण्य में मिश्रित वन पाए जाते हैं, जिनमें साल, सागौन, महुआ और बांस के वृक्ष प्रमुख हैं। यहां की जैव विविधता में तेंदुआ, नीलगाय, चीतल, सांभर, जंगली सूअर और विभिन्न प्रजातियों के पक्षी शामिल हैं।