श्योपुर। पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत ने बुधवार को भाजपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने लीलदा में दलित युवक के अंतिम संस्कार के विवाद पर स्थिति स्पष्ट की।
रावत ने बताया कि स्थानीय मुक्तिधाम रेलवे के अधिग्रहण में चला गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि समय पर दूसरा मुक्तिधाम नहीं बन पाया।
स्थानीय स्तर पर अंतिम संस्कार के लिए एक जमीन तय की गई थी। वहां दोनों पक्षों में मामूली कहासुनी हुई। हालांकि, बाद में भाईचारे से मामला सुलझ गया और दलित युवक का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया
पूर्व मंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर घटिया राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द बना हुआ है। कोई आपसी विवाद नहीं है। रावत ने कहा कि कांग्रेस की यह पुरानी परंपरा है कि वह मौतों पर राजनीति करती है।
उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी भगवान राम के अस्तित्व को नकारती है और धर्म-जातियों में बंटवारा करती है।
रावत ने अपने 40 साल के राजनीतिक करियर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सर्वहारा वर्ग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है।
ये है पूरा मामला
घटना लीलदा गांव की है। गांव का जगदीश जाटव बेंगलुरु में प्राइवेट नौकरी काम करता था। सड़क हादसे में पांच दिन पहले उसकी मौत हो गई थी। सोमवार सुबह करीब 10 बजे शव गांव लाया गया। इसके बाद दोपहर करीब 1 बजे शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे।
आरोप है कि इस पर रावत समाज के लोगों ने आपत्ति जताई। इसके बाद सड़क पर शव रखकर विवाद शुरू हो गया। आक्रोशित परिजन और ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया था। विजयपुर एसडीएम अभिषेक मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर परिजन को समझाइश दी। 6 घंटे बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए माने।