उज्जैन। वैशाख माह के शुभ अवसर अक्षय तृतीया पर बुधवार को शहर के प्रमुख मंदिरों में भारी संख्या में भक्त पहुंचे। भक्तों ने कृष्ण मंदिर में मिट्टी के कलश में जल और फल भरकर ब्राह्मणों को दान किया। शिवालयों में भगवान का जलाभिषेक भी किया गया।
श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर के पुजारी पवन शर्मा ने बताया कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर किया गया दान कभी क्षय नहीं होता। मिट्टी के कलश में जल, शक्कर और फल का दान घर में अक्षय समृद्धि लाता है।
गर्मी के मौसम में मिट्टी की मटकी का दान वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसे उपयोग करने वाले को शीतलता मिलती है। इस अवसर पर प्याऊ लगाने और पक्षियों के लिए पानी के सकोरे रखने का भी विशेष महत्व है।
वैशाख माह में भगवान विष्णु और शिव की विशेष साधना की जाती है। देवों को जल, जलाधिवास और चंदन से प्रसन्न किया जाता है। भगवान को जल चढ़ाकर चंदन का लेपन करने से विष्णु की भक्ति और शिव की कृपा प्राप्त होती है। पितरों को तर्पण व पिंडदान करने से उनकी तृप्ति होती है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।