चीताखेड़ा। रम्भावली जैन तीर्थ स्थल कल्पतरु प्रकट प्रभावी श्री सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ भगवान जिनालय पर ध्वजा दंड कलश प्रतिष्ठा त्रिदिवसीय महामंगलकारी महोत्सव के अवसर पर लाभार्थी परिवार द्वारा चढ़ाई गई। सुबह बैण्ड बाजों और ढोल ढमाकों के साथ गांव के विभिन्न मार्गों से प्रभु का भव्य वरघोडा निकाला गया। वरघोड़े में विशेष विमान में भगवान श्री शांतिनाथ जी का बाल विग्रह प्रतिमा विराजमान थी।
परम् पूज्य आचार्य भगवंत श्री जगत्चन्द्र सूरीश्वर जी म.सा.(डहेलावाला)की सद्प्रेरणा से उतर गुजरात बनासकांठा के भामाशाह श्री मोरवाडा जैन श्री संघ ने श्री रम्भावली तीर्थ में शिखर जीर्णाेद्धार का सम्पूर्ण लाभ लिया। दंड ध्वजा के लाभार्थी श्री मोरवाडा जैन श्री संघ बनासकांठा गुजरात एवं कलश प्रतिष्ठा के लाभार्थी प्रकाश महात्मा मनन महात्मा सुरत निवासी चीताखेड़ा वाले द्वारा चढ़ाई गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रातः 8 बजे नवकारसी के पश्चात् बैण्ड बाजों और ढोल ढमाकों के साथ प्रभु जी का भव्य वरघोडा निकाला गया वरघोड़े में जैन श्रावक श्राविकाएं बड़ी संख्या में नाचते झूमते हुए प्रभु के जयकारों से गुंजायमान करते हुए चल रहे थे। इसी के साथ मंगल मुहूर्त में प्रतिष्ठा एवं लाभार्थी परिवार का.....सारे जहां से अच्छा जिनशासन हमारा जिनशासन जग की शान....., जिनशासन सबसे महान.....,वंदन करते हैं लाभार्थीयों का..... विधि कारक एवं संगीतकार श्री श्रैयांश दक की सुरीले स्वर में भजनों के साथ जैन श्री संघ रंभावली जैन तीर्थ समिति के पदाधिकारियों द्वारा केशर तिलक लगाकर माला, दुपट्टा और शाल श्रीफल भेंटकर बहुमान किया गया। जहां परम् पूज्य साध्वी श्री सुमलया श्री जी म.सा. की सुशिष्या परम् पूज्य साध्वी श्री शासन ज्योति श्री जी म.सा., परम् पूज्य साध्वी श्री दिक्षित प्रभा श्री जी म.सा. के सानिध्य में अगले साल ध्वजा चढ़ाने की बोली का लाभ डॉक्टर अभिजीत जैन मंदसौर ने लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसडीएम यतीन्द्र पोरवाल छोटीसादड़ी पूरे समय उपस्थित थे।
ध्वजा दंड, कलश एवं प्रथम ध्वजा के शुभ प्रसंग पर त्रिदिवसीय महामंगलकारी महोत्सव के अवसर पर सरल स्वभावी परम् पूज्य साध्वी श्री दिक्षित प्रभा श्री जी म.सा. ने धर्म पंडाल में उपस्थित बड़ी संख्या में जैन अनुयायियों को व्याख्यान देते हुए कहा कि हमें मानव भव मनुष्य जीवन मिला है मनुष्य भव मनुष्य जीवन को सद्कर्म करके ही सार्थक बनाना है। भगवान के हुक्म से ही जिनालय पर ध्वजा चढ़ाने का लाभ प्राप्त होता है। जिनालय पर एक बार ध्वजा चढ़ाने से परिवार की 70 पीढ़ियां तर जाती हैं। तीर्थ को घर नहीं बुलाया जा सकता है वहां हमें स्वयं जाना पड़ता है। वहां जाने मात्र से ही तीर्थ की जो उर्जा है उनकी भावना बन जाती है। ध्वजा चढ़ाने का सौभाग्य हर किसी को प्राप्त नहीं होता है। जो व्यक्ति पुण्य शाली होता है उसी व्यक्ति को यह फल प्राप्त होता है। नवकारसी, पूजन विधि प्रारंभ,कुम्भ स्थापना, अखण्ड दीपक, नवग्रह पूजा, दस दिग्गपाल, अष्ट मंगल, स्वामी वात्सल्य, अट्ठारह अभिषेक, भव्य प्रभु भक्ति, श्री शांति स्नात्र महापूजन,द्वारोदघाटन, सत्तर भेदी पूजा, महोत्सव के आधार स्तम्भ, रत्न स्तम्भ, स्वर्ण स्तम्भ, रजत स्तम्भ के सभी लाभार्थियों का श्री रंभावली सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ जैन तीर्थ समिति के पदाधिकारियों द्वारा बारी-बारी से केशर तिलक लगाकर माला दुपट्टा पहनाकर शाल श्रीफल भेंटकर बहुमान किया गया।