जावरा। सिहंस्थ के मद से कई शहरों के रोड बन रहे पर नही पीडब्ल्यूडी ने कोई प्रस्ताव भेजा ना ही जावरा नगरपालिका ने सोचा की मेरे शहर में प्रवेश करने वाला रोड ठीक हो जाए। लापरवाही की हद कर दी पर किसी को कोई लेना देना नहीं है।
कई वर्षों से अपनी दयनीय स्थिति पर आंसू बहा रह सेजवाता भूतेड़ा 2 किलोमीटर मार्ग अभी तक नहीं सुधरा। जब भी इसकी मांग उठती जनता परेशान होकर संबंधित विभाग को बोलती विभाग केवल धूल मिट्टी से मार्ग की लीपा पोती कर देता है और खानापूर्ति कर दी जाती व समय-समय पर जनप्रतिनिधियों को इस मार्ग से अवगत करवाया, जिसकी आवाज विभाग से विधानसभा तक गूंजी पर ऐसा लगता है कि संबंधित विभाग के अफसर के कान तक नही पहुंच पाई।
फिर वहीं कीचड़ फिर वही दुर्घटनाएं जो वर्षों से हो रही है आने वाले समय में इसकी पुनरावृत्ति होने से कोई रोक नहीं सकता है ना तो कोई जनप्रतिनिधि इसकी जिम्मेदारी ले रहा है ना कोई विभाग इस मार्ग की पूछ परख कर रहा है आखिर उन सेंकडो गाँव के विद्यार्थी ,किसान ,छोटे व्यापारी दूध फल सब्जी के विक्रेता का क्या क्या दोष है जो प्रतिदिन इस मार्ग से आवागमन करते हैं? आखिर क्यों इस मार्ग को लावारिस छोड़ दिया गया है?
एक तरफ प्रदेश में रोड़ो का जाल बिछ रहा है वही मात्र 3 किलोमीटर रोड जो की आलोट और जावरा विधानसभा को जोड़ता है शहर में प्रवेश करने का सबसे सुगम रास्ता है मंडी के कई बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं किसान अपनी उपज लेकर मंडी तक पहुचता है ऐसी कई राहगीर है जो अपने निजी वाहन से रोज जावरा शहर में पहुचते है लेकिन शायद वीभगी फाइल टेबल से आगे नही पहुच पा रही है । गर्मी का मौसम शुरू हो गया है ना तो विभाग ने इसकी कोई बड़ी कार्रवाई करी है ना कोई जनप्रतिनिधि ने आगे आकर इसके लिए ठोस कदम उठाए हैं लगातार पत्रकारों के माध्यम से इसकी खबर उठती रही है केंद्रीय मंत्री से लेकर विधायक गणों ने इसकी आवाज विधानसभा भवन तक पहुचाया पर ना कोइ सुधार और ना कोई बड़ी कार्यवाही अपने अंजाम तक पहुच पाई।
भूतेड़ा निवासी समाजसेवी लोकेश शर्मा कई बार इस को लेकर कागजी कार्यवाही की है पर निराशा ही हाथ लगी है पुनः क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मांग कर बारिश के पहले इस रोड के लिए ठोस कदम उठाने के लिए कहा है अगर यह मार्ग इसी हालत में रहा तो आने वाले समय में किसी बड़ी दुर्घटना की जवाब दे ही संबंधित जवाबदारों की होगी।