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May 26, 2025, 4:14 pm
KHABAR : जावद और मनासा के सीएम राईज स्कूल बनकर तैयार, नीमच में अब तो बंद करो सीएम राईज का ये खेल, समाजसेवी किशोर जेवरिया ने उठाई आवाज, पढ़े खबर

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नीमच। आज ये लिखते हुए मन में पीडा भी है, दर्द और गुस्सा भी है कि उन मासूम गरीब बच्चों के भविष्य के साथ ही ये खिलवाड क्यों ? जो बच्चे प्रायवेट स्कूल की भारी भरकम फीस वहां के चोचलों का खर्च और उनके द्वारा थोपी जा रही कॉपी किताबों की विशेष दूकान से लेने की मजबूरी का बोझ नहीं उठा सकते, उनके लिये सरकार ने वैसी या उनसे बेहतर नहीं तो कमतर भी नहीं सुविधाओं वाले स्कूल की योजना जो 2017 में लाई गई थी। नीमच जिले में जिला मुख्यालय के अतिरिक्त जावद और मनासा ब्लॉक में भी स्कूल बनाये जाने थे। जावद और मनासा के स्कूल बनकर तैयार हो गए जिसका उद्घाटन पिछले दिनों मुख्यमंत्री के हाथों हो गया। मनासा का स्कूल भी कुछ दिनों में उद्घाटित हो जाएगा।
तकलीफ तो इस बात की है कि नीमच जिला मुख्यालय होते हुए भी अभी तक भूमि चयन में ही उलझा हुआ है। क्या हमारे जनप्रतिनिधी और जिला अधिकारी इतने विवेक शून्य और नाकारा हो गये हैं कि वे बार बार उन जगहों का ही चयन करते हैं जो या तो उपयुक्त नहीं होती या शहर से दूर होती है या विवादित होती है। मैंने अपने पिछले तीन लेखों में भी अलग-अलग कई जगह सुझाई थी। कृति संस्था व पालक संघ भी उपयुक्त और पर्याप्त जगह सुझा चुके हैं परन्तु आप फिर फिर किसी ऐसी जगह का चयन क्यों करते हैं जो अनुपयुक्त या विवादित हो। क्या इसलिये कि सीएम राईज का यह प्रोजेक्ट लटका रहे। क्यांकि हम देख चुके हैं कि यहां के जनप्रतिनिधि और जिलाधिकारियों के दिल में गरीबों और वंचितों के प्रति हमदर्दी केवल और केवल भाषणों में होती है, दिखावे के लिये होती है, हकीकत में वे इनके प्रति लापरवाह और असंवेदनशील ही हैं।
स्वार्थ और राजनीति का खुला खेल जमीनों को लेकर किया जा रहा है। आये दिन यह देखने और पढने में आता है कि उस जमीन पर कब्जा हो गया, इस जमीन पर कब्जा करने की तैयारी में है। ये जमीन पार्टी कार्यालय के लिये दे दी। उस जमीन पर मंदिर बना दिया, वह जमीन उस भूमाफिया ने हडप ली। अरे इस शहर को मजाक बना रखा है। सत्ताधारी दल मनमर्जी कर रहा है तो विपक्षी दल मात्र औपचारिक विरोध तक सीमित रह गये हैं। किसी ने भी अवैध कब्जों के विरूद्ध कोर्ट में जाकर कोई पीटिशन दायर की हो तो बताए।
पार्शदों में से कुछ पार्शदों ने तो यह धंधा बना रखा है कि किसका मकान दूकान बन रहा है, किसने एमओएस का उल्लंघन किया है, किसकी बाउण्ड्रीवाल 6 इंच या 1 फीट बाहर निकली है, किसको नोटिस देने से कितनी रकम मिलेगी ? किसी पार्षद ने बंगला बगीचा की बकौल हमारे जनप्रतिनिधियों हाथी निकल गया पूंछ अटकी हुई है, इस पूंछ को निकालने का 2017 से आज तक कोई प्रस्ताव नगरपालिका में लाए हैं ?
किसी ने उन बच्चों की चिंता की हो तो बताएं कि उन्होंने कब इस बाबत कोई प्रस्ताव या पत्र जिम्मेदार जनप्रतिनिधि अधिकारी या मंत्री को दिया है। नहीं आपको उन बच्चों से क्या मतलब?
वैसे तो मेरे इस लिखने से आप में से किसी को कोई फर्क नहीं पडेगा क्योंकि आप लोगों में संवेदना बची ही नहीं है। फिर भी चूंकि मेरी संवेदनाएं मुझे उन बच्चों के लिये आवाज उठाने के लिये प्रेरित करती है तो लिख देता हूं। आपके मन में रत्तीभर भी मानवता का भाव उत्पन्न हो जाए तो इसके लिये जो जगह उपयुक्त है, वहां काम शुरू करवा दीजिये। अब सीएम राईज के लिये जगह चयन का खेल बंद कीजिये। बच्चों के भविष्य के साथ आपने बहुत मजाक कर लिया।

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