कोटा। राजस्थान के कोटा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कोर्ट ने केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर सहीराम मीणा और एक दलाल को 7 साल पुराने चर्चित रिश्वत प्रकरण में दोषी करार देते हुए 3-3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, कोर्ट ने डिप्टी कमिश्नर मीणा पर 50,000 और दलाल कमलेश धाकड़ पर 30,000 का जुर्माना भी लगाया है।

अफीम पट्टे और मुखिया नियुक्ति में होती थी अवैध वसूली-
सरकारी वकील जया गौतम ने बताया कि मामला 26 जनवरी 2019 का है। एसीबी को सूचना मिली थी कि नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी अफीम लाइसेंस धारकों से पट्टे जारी करने और ग्राम मुखिया की नियुक्ति के एवज में रिश्वत मांग रहे हैं। जांच में सामने आया कि यह रिश्वत एक दलाल के माध्यम से वसूली जा रही थी।

कॉल रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा-
एसीबी ने मामले में दलाल कमलेश धाकड़ के मोबाइल को सर्विलांस पर लिया। कॉल रिकॉर्डिंग से स्पष्ट हुआ कि सहीराम मीणा ने कमलेश से उसके पिता नंदलाल धाकड़ को ग्राम मुखिया बनाए जाने की एवज में 1 लाख की रिश्वत की मांग की थी।

गणतंत्र दिवस पर रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार-
26 जनवरी 2019 को सुबह कमलेश धाकड़ यह रकम लेकर सहीराम मीणा के कोटा स्थित सरकारी आवास पर पहुंचा। जैसे ही उसने रकम सौंपी, पहले से तैनात एसीबी की टीम ने इशारा मिलते ही छापा मारकर सहीराम मीणा और कमलेश धाकड़ दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इससे खास बात यह रही कि गिरफ्तारी से कुछ देर पहले ही सहीराम मीणा ने अपने कार्यालय में गणतंत्र दिवस पर झंडारोहण कर कर्मचारियों को ईमानदारी से कार्य करने की नसीहत दी थी।

28 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला-
जांच पूरी होने के बाद एसीबी ने कोर्ट में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान 28 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश अश्विनी शर्मा की कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सजा सुनाई।
एसीबी की कार्रवाई ने खोली विभागीय भ्रष्टाचार की परतें-
यह मामला नारकोटिक्स विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करने वाला है, जहां अफीम के संवेदनशील लाइसेंस और ग्राम स्तर पर प्रभावी पदों की नियुक्ति तक में रिश्वत का खेल चलता था। एसीबी की कार्रवाई से अफीम उत्पादकों और ग्रामीणों से अवैध वसूली की इस कड़ी पर रोक लगी।