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August 29, 2025, 11:43 am
KHABAR : कलेक्टर कार्यालय के सरकारी भूमि की होगी नीलामी, इसके पहले टेबल, कुर्सी, पखें की हो चुकी कुर्की, जानिए क्या है मामला, पढे़ खबर 

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बड़वानी। जिले में इंदिरा सागर परियोजना से प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि भुगतान मामले में जिला न्यायालय ने कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि समय पर भुगतान न होने पर कलेक्टर कार्यालय सहित सभी सरकारी विभागों की भूमि नीलाम कर दी जाएगी। जिला न्यायालय ने साल 2020 में किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया था।


स्पष्ट न्यायिक आदेश बाद भी मुआवजे का भुगतान नहीं
सरकार ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने 2023 में सरकार की अपील खारिज कर दी। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च न्यायालय ने भी 2023, 2024 और 2025 में सरकार की अपील खारिज कर दी। इतने स्पष्ट न्यायिक आदेशों के बावजूद सरकार ने अब तक मुआवजे का भुगतान नहीं किया है। यदि जल्द ही भुगतान नहीं किया गया तो जिले का प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो सकता है। कलेक्टर कार्यालय की भूमि की नीलामी से सरकारी कामकाज ठप होने की आशंका है।


5-5 वर्षों में भी डिक्री का पालन नहीं
किसानों के अधिवक्ता उमेश पाटीदार ने कहा, कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय तक से केस हारने के बाद भी भुगतान में विलंब कर रही है। यह प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा है, जिसके कारण शासन को गंभीर आर्थिक नुकसान हो रहा है। माननीय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के ऐसे कई आदेश हैं कि डिक्री के पालन में लगी बजावरियों का निराकरण 6 माह में हो जाना चाहिए, लेकिन यहां पर 5-5 वर्षों में भी डिक्री का पालन नहीं हो रहा है।


न्यायालय की अवमानना का मामला
इस प्रकार का विलंब सीधे-सीधे न्यायालय की अवमानना का मामला बनता है। आखिर इतनी देरी के कारण शासन को जो आर्थिक नुकसान हो रहा है और अनावश्यक ब्याज देना पड़ रहा है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? भुगतान न होने के कारण न्यायालय के आदेश पालन हेतु बजावरी चल रही है, जिसके तहत कलेक्टर कार्यालय, एन.व्ही.डी.ए. के भू-अर्जन कार्यालय और नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 11 के फर्नीचर, पंखे और अन्य वस्तुएं कुर्क की गई हैं।


मामले में भविष्य में और भी सख्त कार्यवाही
न्यायालय द्वारा बार-बार चल संपत्ति की कुर्की के वारंट जारी किए गए हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है, इसलिए माननीय न्यायालय को मजबूर होकर अचल संपत्ति की कुर्की की निर्णायक कार्यवाही प्रारंभ करने का सूचना पत्र देना पड़ा। उन्होंने बताया कि हमने किसानों की ओर से न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर जिले के आर्थिक लेन देन के सभी खातों पर रोक लगाने की तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही करने की भी मांग की है। इस मामले में भविष्य में और भी सख्त कार्यवाही हो सकती है।

 

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