मंदसौर। वर्षा ऋतु एवं खेतों में कार्य के दौरान सर्पदंश की घटनाएँ अधिक होती हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने नागरिकों से सर्पदंश से बचाव एवं प्राथमिक उपचार को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। चिकित्सकों के अनुसार, सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय सही कदम उठाना जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
सावधानियां एवं बचाव के उपाय-
- खेत, झाड़ियों, अंधेरी जगहों एवं कच्चे घरों में जाते समय सतर्क रहें।
- रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करें।
- खेतों में कार्य करते समय ऊँचे जूते एवं पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
- घर के आसपास की झाड़ियों, घास-फूस और कचरे की सफाई रखें।
सर्पदंश होने पर क्या करें-
- मरीज को शांत रखें और ज्यादा हिलने-डुलने से बचाएँ।
- दंश वाले स्थान को न हिलाएँ और न कसकर बाँधें।
- दंश स्थल को न काटें और न ही चूसने का प्रयास करें।
- तुरंत मरीज को नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र/अस्पताल पहुँचाएँ।
- अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध होता है, जो सबसे प्रभावी उपचार है।
चिकित्सकों ने आमजन से अपील की है कि सर्पदंश को कभी भी हल्के में न लें और समय पर अस्पताल पहुँचकर उपचार कराएँ। समय पर उपचार से जीवन बचाया जा सकता है।