चित्तौड़गढ़। सप्तशक्ति संगम के अंतर्गत विद्या निकेतन बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, गोलवलकर नगर, चित्तौड़गढ़ में मातृ सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। अतिथियों का परिचय संयोजक ललिता कंवर राठौड़ ने दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. सुशीला लड्ढा ने “कुटुंब प्रबोधन” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नारी परिवार की केंद्र बिंदु है। उन्होंने कहा कि शक्तिपुंज नारी ही हर युग में परिवार और समाज को संस्कारित करती रही हैं। वर्तमान समय में भी पर्यावरण संरक्षण तथा संस्कारों के संवर्धन का दायित्व मातृशक्ति ही निभा सकती है। संयुक्त परिवार में पलने वाला बालक संस्कारित होकर श्रेष्ठ नागरिक बनता है।
विशिष्ट अतिथि लीला आगल ने वर्तमान समय की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माताएँ बच्चों को गैजेट्स, लव जिहाद और लिव-इन जैसी सामाजिक समस्याओं से दूर रखने के लिए उन्हें पर्याप्त समय और स्नेह दें। उन्होंने कहा — “राम जैसी संतान पाने के लिए स्वयं को कौशल्या बनना होगा।”
अध्यक्षीय उद्बोधन में सरस्वती शर्मा ने वैदिक यज्ञ, पूजा और आरती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बहनों का ध्यान पर्यावरण संरक्षण की ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम के दौरान जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करने वाली संतोष मल्होत्रा, ऋतु भोजवानी, योगिता कंवर गेहलोत और दीपिका कंवर झाला को सम्मानित किया गया।
विद्यालय की बालिकाओं ने रानी पद्मिनी, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और दिव्य देवियों की झाँकी प्रस्तुत कर वातावरण को दिव्यता से भर दिया। सम्मेलन में कुल 85 मातृशक्ति उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का संचालन राजकुमारी ने किया, जबकि पुष्पा शर्मा ने प्रश्नोत्तरी का संचालन किया। सही उत्तर देने वाली माताओं को “पुण्यशलोका अहिल्याबाई होलकर” की जीवनी भेंटस्वरूप प्रदान की गई।
कार्यक्रम का संचालन एवं आयोजन जिला संयोजिका मधु मट्ठा और जिला सह-संयोजिका प्रेमलता महंत के निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।