नीमच। नगर पालिका परिषद का 31 अक्टूबर को आयोजित विशेष सम्मेलन शुक्रवार को राजनीतिक टकराव के मंच में बदल गया। केंद्र सरकार के जीएसटी सुधारों पर लाए गए प्रस्ताव पर हुई बहस तीखी नारेबाजी और हंगामे में तब्दील हो गई। स्थिति उस समय और बिगड़ गई, जब नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापति को बोलने से रोका गया और सीएमओ द्वारा उनका माइक छीन लिया गया।

इस घटना से आक्रोशित होकर प्रजापति ने नपा प्रशासन के खिलाफ अभूतपूर्व विरोध दर्ज कराया। वह अपना निजी लाउडस्पीकर और माइक लेकर परिषद हॉल पहुंचे और उसी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “जब जनहित में बोलने की कोशिश की तो माइक छीन लिया गया। इसलिए अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए मुझे निजी माइक लाना पड़ा। यह परिषद में कांग्रेस की आवाज़ दबाने का प्रमाण है।”

यह अप्रत्याशित दृश्य पूरे सदन का केंद्र बन गया। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा पार्षद वीरेंद्र पाटीदार ने भी उसी निजी माइक का उपयोग किया, जिस पर नपा अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा ने गहरी नाराज़गी जताई।

सम्मेलन की शुरुआत से ही माहौल गरम था। जैसे ही जीएसटी सुधारों के समर्थन में प्रस्ताव पढ़ा गया, भाजपा पार्षद “मोदी-मोदी” के नारे लगाने लगे, वहीं कांग्रेस पार्षदों ने “छूट नहीं ये लूट है” और “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाते हुए जवाब दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा ने कई बार शांति की अपील की, लेकिन शोर-शराबे के बीच उनकी कोई नहीं सुनी गई। अंततः उन्हें पांच मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

हंगामे और विरोध के बावजूद, सम्मेलन में रखे गए चारों प्रस्ताव पारित कर दिए गए। इनमें जीएसटी सुधारों और आत्मनिर्भर भारत संकल्प से जुड़े प्रस्तावों के साथ-साथ शनि मंदिर से कारगिल चौराहा तक स्मार्ट पोल व स्ट्रीट लाइट कार्य तथा कंसल्टेंसी कार्य की स्वीकृति शामिल थी। भाजपा पार्षद वीरेंद्र पाटीदार ने कंसल्टेंसी कार्य की न्यूनतम दर वाले चौथे प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई।

अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा ने कहा कि परिषद शहर हित में निरंतर कार्य कर रही है। हालांकि, लगातार नारेबाजी और अव्यवस्था के कारण यह विशेष सम्मेलन नगर निकाय की गरिमा पर प्रश्नचिह्न छोड़ गया। आम जनता की नजर में यह बैठक जनहित से अधिक राजनीतिक प्रदर्शन साबित हुई।
