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August 11, 2026, 11:21 am
KHABAR : मंडियों में ई-सिस्टम से पारदर्शिता आई, ई-गवर्नेंस पुरस्कार भी मिला, उज्जैन मंडी में 7 करोड रोज की सोयाबीन बिकती है, पढे़ खबर 

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उज्जैन। मध्य प्रदेश की 260 से अधिक कृषि उपज मंडियां अब ई-सिस्टम से चलने लगी है। उज्जैन मंडी में रोज सीजन में 6 से 7 करोड रुपए की सोयाबीन और गेहूं के सीजन में 4 से 5 करोड रुपए का गेहूं किसान बेचने लाते हैं।


पहले हाथ से बनी नीलाम पर्ची होती थी, अब ऑनलाइन पर्ची होने से भाव में किसी प्रकार की हेरा फेरी की संभावना नहीं रह पाती है। इसी प्रकार किसान का तोल भी ऑनलाइन होने से इसमें भी फेरबदल नहीं किया जा सकता और भुगतान 2 लाख से कम नगद 200000 से अधिक का आरटीजीएस से 24 घंटे में अकाउंट में पहुंचना जरूरी है। यह सिस्टम भी अब लागू होने से पारदर्शी व्यवस्था में किसानों का भुगतान भी समय पर हो रहा है।


किसानों की सुविधा को बढ़ाने में मंडी बोर्ड ने तकनीकी खामियों को दूर कर ई-अनुज्ञा लागू कर दी। अब व्यापारी को उपज का परिवहन करना हो तो ऑनलाइन अनुज्ञा बनाना पड़ता है लेकिन उन्हें मंडी कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होती है। अपने ऑफिस में बैठकर ही इसे बनाया जा सकता हैै। ऐसे में आउटपुट के रूप में मंडी शुल्क भी हाथोहाथ ऑनलाइन जमा हो जाता है। ऐसे में मंडी शुल्क वसूली करने की आवश्यकता नहीं है।


उज्जैन मंडी में अब किसानों से डाला भरने के लिए 20 से 40 किलो उपज नहीं देना पड़ती है। डाला भरने के लिए 10 रुपए बोरी मजदूरी तय की गई है। अगर यह नहीं करते हुए डाला भरने के बदले में उपज तुली तो तुरंत कार्रवाई की जाती है। फाजलपुर में गेट खुलने से किसानों को व्यापारियों को आवाजाही में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आ रही है।


हाल ही में मंडी में एक दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी थी। ऐसे में बाहर की आवाजाही जो वर्षों से इस मंडी को रोड के रूप में इस्तेमाल किया जाता था उस पर रोक लगा दी गई है। मंडी बोर्ड भोपाल को वर्ष 2020 में ई-गवर्नेंस पुरस्कार मिला था। यह पुरस्कार उनके नवीन एमपी फार्म गेट एप के माध्यम से किसानों को घर बैठे फसल बेचने की सुविधा पर मिला।

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