भगवानपुरा। नगर स्थित शासकीय महाविद्यालय भगवानपुरा में मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार तीन दिवसीय मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ देशभक्ति और गर्व के माहौल में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं मध्य प्रदेश गान के सामूहिक गायन से हुई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रकाश सोलंकी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश का इतिहास भारत के गौरव का अभिन्न अंग है। यहां की गुफाएँ मानव सभ्यता के आरंभ की साक्षी हैं, तो खजुराहो और सांची जैसे स्मारक भारतीय संस्कृति की ऊँचाई का प्रतीक हैं। इस भूमि ने कालिदास जैसे महान कवि, सम्राट अशोक जैसे शासक, राजा भोज जैसे विद्वान और टंट्या भील जैसे वीर योद्धा दिए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मध्य प्रदेश केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी भारत की आत्मा का प्रतिबिंब है। वास्तव में यह प्रदेश भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का धड़कता हुआ हृदय है।
डॉ. सोलंकी ने विद्यार्थियों को बताया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश राज्य का गठन हुआ था। यहां के लोकनृत्य, लोकगीत, लोककथाएं और त्योहार राज्य की आत्मा हैं, जिन्हें हमें संरक्षित और संजोकर रखना चाहिए।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्रशासनिक अधिकारी डॉ. रजनी सोलंकी, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सेवक चौहान, डॉ. मनीष चौहान एवं डॉ. अनीता चौहान सहित अनेक प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। विद्यार्थियों में अनिल सोलंकी, शिवानी डावर, गायत्री बडोले एवं रोशनी बडोले विशेष रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. विवेक दुबे ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. रोहित पाटीदार ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर में मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करने वाली विभिन्न गतिविधियाँ एवं चर्चाएँ भी आयोजित की गईं।