नीमच। आजादी के 78 वर्ष बाद भी सामाजिक समानता का सपना अधूरा दिखाई दे रहा है। जिले की तहसील नीमच के ग्राम सकरानी रैय्यत में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत स्वीकृत एक दलित मजदूर का मकान जातिगत भेदभाव और दबंगई की भेंट चढ़ गया है।
पीड़ित रतनलाल पुत्र डूंगरलाल भाटी (35), जाति मोगिया (अनुसूचित जाति) ने बताया कि उन्हें वर्षों बाद प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला था। पहली किश्त मिलने के बाद उन्होंने पुराना कच्चा घर तोड़कर नया मकान बनाना शुरू किया, लेकिन गांव के दबंग बबलू नागदा ने पंचायत सचिव व राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से यह कहकर निर्माण रुकवा दिया कि ज़मीन शासकीय है जबकि उसी सर्वे नंबर पर एक अन्य परिवार का पीएम आवास पहले से बना हुआ है।
रतनलाल का कहना है कि वे और उनका परिवार पिछले सात महीनों से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि गांव में उनका परिवार ही एकमात्र दलित परिवार है, जिसे आज भी सामाजिक भेदभाव झेलना पड़ रहा है।
पीड़ित ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर कई शिकायतें (क्रमांक 32121382, 32121205, 31880809) दर्ज कराईं, लेकिन बिना निष्पक्ष जांच के उन्हें “फोर्स क्लोज” कर दिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री, अनुसूचित जाति आयोग और मानवाधिकार आयोग को ज्ञापन भेजकर जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
स्थानीय प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। तहसील और पंचायत स्तर पर मामले को जांचाधीन बताया जा रहा है। दलित संगठनों ने इसे अनुसूचित जाति उत्पीड़न का गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
पीड़ित रतनलाल ने कहा हमारे समाज का गांव में एक ही परिवार है। ऊँची जाति के लोग हमें आज भी अछूत समझते हैं। प्रधानमंत्री आवास मिला तो लगा कि अब अपना घर बनेगा, लेकिन वह भी छीन लिया गया। अब परिवार खुले आसमान के नीचे है अगर न्याय नहीं मिला तो जान दे दूँगा।