प्रतापगढ़। जिले में करोड़ों रुपए की लागत से निर्माणाधीन बाईपास अब विकास का नहीं, बल्कि मौत का प्रतीक बनता जा रहा है। अधूरा निर्माण, ठेकेदारों की लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह मार्ग आमजन के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। ताजा हादसा शनिवार सुबह मंदसौर रोड ओवरब्रिज के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार ट्रॉले की टक्कर से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई।
हादसे में 27 वर्षीय प्रीतम पंचाल, निवासी साटोला, की जान चली गई। प्रीतम अपनी मोटरसाइकिल से सीतमऊ (मध्यप्रदेश) एमएससी ओपन की परीक्षा देने जा रहा था। सुबह करीब 11:30 बजे ओवरब्रिज के नीचे से अचानक तेज गति से आए कंटेनर (RJ 06 GC 5297) ने बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक सड़क पर घिसटता चला गया। राहगीरों की मदद से उसे 108 एंबुलेंस द्वारा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक के पिता हरीश पंचाल ने कंटेनर चालक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है और प्रशासन की लापरवाही पर भी सवाल खड़े किए हैं।
एक माह में तीसरा बड़ा हादसा-
निर्माणाधीन बाईपास पर यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले एक माह में यहां तीन बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें दो युवकों की मौत हो चुकी है, जबकि सात से अधिक लोग घायल हुए हैं।
30 जनवरी को बगवास नए बाईपास पर हुए हादसे में 35 वर्षीय अनिल गोस्वामी की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं 6 फरवरी को बसाड़ के पास एक कैप्सूल ट्रेलर ने कार को टक्कर मार दी, जिसमें चार लोग घायल हुए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई।
न लाइट, न संकेतक, न डायवर्जन – सिर्फ खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाईपास पर न तो पर्याप्त स्ट्रीट लाइट हैं, न चेतावनी संकेतक और न ही सुरक्षित डायवर्जन की व्यवस्था। इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी है, जो कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी और मौत के इंतजार में है या समय रहते इस “मौत के बाईपास” पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।- यूनुस अहमद मंसूरी, प्रतापगढ़ (राजस्थान)