निम्बाहेडा। संयम रूपी सुवास युक्त अमृत पुष्प मनुष्य भव रूपी भूमि में ही उगता है। चंद्रप्रभु भगवान ने मनुष्य जीवन में ही सम्मेद शिखरजी में जाकर अपने जीवन को पुरुषार्थ से मोक्ष रूपी अमृत पुष्प बनाया। निर्वाण महोत्सव पर निर्वाण लाडू चढ़ाने का औचित्य अचिंत्य है जो जैन दर्शन में दीक्षित परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ने शान्तिनाथ जिनालय में उपस्थित जनसमूह को संबोधन करते हुए कही। वे यहाँ आयोजित धर्म सभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि जैसे गोल का कोई आदि मध्य और अंत नहीं होता वैसे ही अनंत सुख के भोक्ता सिद्ध भगवान का सुख आदि मध्य और अंत से रहित है। अर्थात शाश्वत होता है। हमें भी शाश्वत सुख की प्राप्ति हो इसी भावना से हम भगवान के श्री चरणों में निर्वाण लाडू चढ़ाते हैं। धर्म सभा में आर्यिका ज्ञेभ्याश्री, ज्ञापकश्री, ज्ञेयकश्री,क्षुल्लिका विज्ञप्तिश्री आदि ने धर्म सभा को सम्बोधित किया। तत्पश्चात् विशेष पूजा अनुष्ठान के साथ आयोजित धार्मिक कार्यक्रम मे बड़ी संख्या मे उपस्थित श्रद्धांलुओं ने निर्वाण लाडू चढ़ाया। प्रवक्ता मनोज़ सोनी के अनुसार आर्यिका वृंदो के सानिध्य मे आदर्श कॉलोनी स्थित शान्तिनाथ मंदिर मे प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे जिन सहस्रनाम मंत्रावली, 7ः30 बजे शांतिधारा,9 बजे प्रवचन,दोपहर 3 बजे स्वाध्याय आत्मानुशासन, सायं 6ः30 बजे गुरु भक्ति एवं शंका समाधान,आरती तत्पश्चात साधु संतों की वैय्यावृत्ति सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन आयोजित किये जा रहे हैं। इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष अशोक गदिया, महामंत्री विनोद जैन एवं महेंद्र पाटनी, संरक्षक सुशील काला तथा राजेश गंगवाल, जयप्रकाश जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन सहित नगर के प्रबुद्धजन उपस्थित हों रहे हैं।