मंदसौर। शहर के शासकीय अस्पताल में लापरवाही का एक मामला सामने आया है। शनिवार रात एक मरीज को कैनुला लगाने के दौरान संबंधित वार्ड में पर्याप्त रोशनी नहीं थी। ऐसी स्थिति में डॉक्टर को मोबाइल की फ्लैशलाइट की मदद से कैनुला लगानी पड़ी। कम रोशनी में उपचार करना मरीज के लिए जोखिमपूर्ण माना जाता है।
अंधेरे में इलाज से बढ़ा खतरा-
जानकारी के अनुसार संबंधित वार्ड में लंबे समय से पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं थी। रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती थी। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को इसी वातावरण में कार्य करना पड़ रहा था। कम रोशनी में नस ढूंढने, इंजेक्शन लगाने या अन्य उपचार के दौरान त्रुटि की संभावना बढ़ जाती है, जिससे मरीज की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।
खबर के बाद हरकत में आया प्रबंधन-
मामले की खबर सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन सक्रिय हुआ और वार्ड में नए बल्ब लगवाकर रोशनी की व्यवस्था दुरुस्त कर दी। अब सामान्य प्रकाश में उपचार किया जा रहा है, जिससे मरीजों और स्टाफ को राहत मिली है।
जिम्मेदारों पर उठे सवाल-
हालांकि समस्या का समाधान कर दिया गया है, लेकिन यह प्रश्न उठता है कि इतनी गंभीर कमी पहले क्यों नहीं सुधारी गई। क्या अस्पताल में नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था प्रभावी नहीं थी?